मैदान के डिग्री कालेजों में लंबे समय से जमे ‘गुरुजी’ को इस बार पहाड़ चढ़ना पड़ सकता है। इसके लिए उच्चशिक्षा निदेशालय ने तबादला सत्र के दौरान डिग्री कालेजों के प्राध्यापकों के स्थानांतरण भी किए जाने की तैयारी कर दी है। प्राध्यापकों से मांगे गए तबादला विकल्प पत्रों की छंटनी का काम भी चल रहा है। इसके अलावा जिन प्राध्यापकों ने विकल्प फार्म नहीं भरे थे उनकी भी सूची तैयार हो रही है।
प्रदेश में स्नातकोत्तर एवं डिग्री स्तर के राजकीय महाविद्यालयों की संख्या बढ़कर अब 90 तक पहुंच गई है। इनमें एक दर्जन से अधिक पहाड़ के महाविद्यालय ऐसे हैं जो कि संविदा प्राध्यापकों के सहारे चल रहे हैं। इसके अलावा ऐसे प्राध्यापकों की बड़ी संख्या है जो कि 10 से 18 वर्ष की अवधि से मैदान के ही डिग्री कालेजों में जमे हैं, लेकिन इस बार शासन उच्चशिक्षा विभाग में कुछ फेरबदल करने जा रहा है, इसके लिए उच्चशिक्षा निदेशालय में भी तैयारी शुरू हो गई है।
सूत्रों के अनुसार इस बार तबादला सूची में 10 साल से ऊपर तक मैदान में तैनाती वाले प्राध्यापकों को पहाड़ के कालेजों में भेजने की तैयारी हो रही है। बताते हैं कि उच्चशिक्षा निदेशालय ने प्राध्यापकों से तबादले के संबंध में पहले ही विकल्प फार्म भरवाकर मंगवा लिए थे। इसकी अंतिम तिथि 31 मार्च थी। निदेशालय में प्राध्यापकों द्वारा भर कर भेजे गए विकल्प फार्मों की छंटनी का काम भी चल रहा है, इसके साथ ही विकल्प फार्म नहीं भरने वाले प्राध्यापकों के नाम भी तलाशे जा रहे हैं।
ये है स्थिति
- राजकीय महाविद्यालय - 90
- नियमित प्राध्यापक - 695
- संविदा प्राध्यापक - 407
- प्राध्यापकों के रिक्त पद - 575
उच्चशिक्षा विभाग की कोई अलग से तबादला नीति नहीं बनी है। लिहाजा प्राध्यापकों के स्थानांतरण के संबंध में शासन के जो भी दिशा-निर्देश होंगे, उसी के अनुरूप कार्यवाही की जाएगी। फिलहाल निदेशालय में प्राध्यापकों की सूची तैयार कर उनके द्वारा भरे गए विकल्प फार्मों की छंटनी हो रही है।
-डा.बीसी मेलकानी, प्रभारी निदेशक उच्च शिक्षा।