रामनगर। एक माह से अधिक समय से आतंक का पर्याय बनी बाघिन के लिए वन विभाग ने सभी जतन कर डाले। अभी तक कोई सफलता नहीं मिल पाई है। इससे विभाग चिंतित है तो ग्रामीण भयभीत व आक्रोशित। विभाग रविवार को भी हेलीकाप्टर से बाघिन की खोज के लिए उड़ान भरेगा।
शनिवार को तराई पश्चिमी वन प्रभाग के आमपोखरा रेंज के गुमानपुर क्षेत्र के साथ ही दर्जनों गांवों के ऊपर सुबह ग्यारह बजे से दो बजे तक हेलीकाप्टर से बाघिन की तलाश की गई। बाघिन तो नहीं दिखी लेकिन गन्ने, धान, आम, लीची के बगीचों से छोटे वन्यजीव भागते नजर आए।
कुमाऊं वृत्त के वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि शनिवार को पहली बार खेत खलिहानों में हेलीकाप्टर से अभियान सुबह ग्यारह बजे पचास से साठ फीट की ऊंचाई व बीस से तीस किमी प्रति घंटा की रफ्तार से शुरू किया। फिर दिन में साढे़ तीन से साढे़ चार बजे तक उड़ान भरी, जिसमें हाक डियर, चीतल, सांभर, सुअरों के साथ ही नीलगाय, मोर हेलीकाप्टर की आवाज सुन गन्नों के खेतों से निकलकर भाग रहे थे। लेकिन बाघ व गुलदार जैसे जानवर नहीं दिखे।
श्री धकाते ने बताया कि ये नया अनुभव था, इसलिए कई चुनौतियां भी बनी हुई है। जैसे शनिवार को पचास से साठ फीट की ऊंचाई से उड़ान भरी, उससे अधिकांश किसानों के गन्ने को हवा के कारण काफी नुकसान हुआ। जिससे अधिकांश ग्रामीण आक्रोशित थे। उन्होंने कहा कि इन्हें मुआवजा दिया जाएगा। रविवार को सौ फीट की ऊंचाई से उड़ा भरी जाएगी। श्री धकाते ने बताया कि वन्यजीवों के लिए गन्ने के खेत व नालों में पर्याप्त होने के कारण वह यहां डेरा जमाए हुए हैं। कैमरा ट्रेप में भई बाघिन नहीं मिली। रविवार को भी हेलीकाप्टर से अभियान जारी रहेगा।
रामनगर। आदमखोर बाघिन को मारे जाने, आबादी वाले क्षेत्रों में घुसने वाले हिंसक वन्यजीवों को मारने का अधिकार जनता को दिए जाने व वन्यजीवों के हमले में मारे गये व्यक्ति के परिजनों को 50 लाख व घायल को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिये जाने आदि मांगो को लेकर ईंको सेंसिटिव जोन विरोधी संघर्ष समिति की रविवार को दोपहर एक बजे से कानिया चौराहे पर बैठक होगी।
समिति के संयोजक ललित उप्रेती ने बताया कि सरकार व वन महकमे के पास जंगली जानवरों को बचाने के लिए तो भरपूर संसाधन है लेकिन इंसानों को जंगली जानवरों से बचाने के लिये ना तो सरकार के पास कोई कार्य योजना है ओर ना ही पर्याप्त संसाधन है। पिछले एक माह में बाघिन लगातार आबादी में घुसकर हमले कर रही है और सरकार व वन महकमा उसके आगे असहाय दिखाई दे रहा है। समिति के सहसंयोजक महेश जोशी ने कहा कि सरकार ने उत्तराखंड को जंगल प्रदेश बनाकर रख दिया है। आज ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल भेजने में भी डर रहे है। अब जनता के पास संघर्ष ही एक मात्र रास्ता बचा है। उन्होंने कहा कि रविवार को होने वाली बैठक में आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी।
रामनगर। क्षेत्र में एक माह से अधिक समय से आतंक मचाए बाघिन के पीछे वन विभाग पानी की तरह बेहिसाब पैसा बहा रहा है। विभाग के कर्मचारी भी अन्य रेंजों को छोड़ इस अभियान में डटे हुए हैं। यह अभियान छह सितंबर को तल्ला कानिया निवासी गोविंदी देवी के मारे जाने के बाद से शुरू हुआ जो अभी तक जारी है।
जिससे विभाग को समय व पैसे की तो बर्बादी हो ही रही है इतने लंबे अभियान के बाद भी बाघिन के ना मिलने से जहां किसानों के गन्ने का रोड़ा विभाग के आगे आ रहा है जिससे किसान भी काफी दोहरी मार झेल रहे है। कई कृषकों ने रोष भरे शब्दों में कहा कि इतना समय हो गया फिर भी विभाग ने कृषकों के बीच जाकर कोई ठोस रणनीति नहीं बना पाया है।
ब्लाक प्रमुख संजय नेेगी ने कहा कि विभाग का अभी तक जितना खर्चा इस अभियान में हुआ है। यदि विभाग चाहता तो अभियान में आ रही गन्नो की फसलों का उचित मुआवजा बाजार भाव से किसानों को देता और बाघि न को पकड़ने में भी मदद मिलती। जिससे समय और पैसा दोनों की बचत होती।