सर्किट हाउस में आयोजित जिला पंचायत की समीक्षा मीटिंग में जमकर बवाल हुआ। मामला लैटर पैड से उठा तो आरोप-प्रत्यारोपों की झड़ी लग गई। तकरार बढ़ने पर मीटिंग का अफसरों ने बहिष्कार कर दिया और शिकायती पत्र लेकर डीएम के पास पहुंच गये।
वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष ने इसे सदन का अपमान बताया। उनका कहना है कि इस मामले में अफसरों को स्पष्टीकरण देना होगा। सदस्यों ने वित्त मंत्री से मिलकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया।
दिनभर इसको लेकर गहमागहमी रही। अब संवाद बनाने और कड़ुवाहट को दूर करने के लिये प्रशासन दोनों के बीच ‘सद्भावना मीटिंग’ कराने की तैयारी कर रहा है।
जिला पंचायत की हर तीन महीने में विकास कार्यों को लेकर समीक्षा मीटिंग होती है। इसमें करीब सभी सरकारी महकमे शामिल होते हैं। मीटिंग शुरू होने से पहले ही हंगामा शुरू हो गया। भाजपा से जुड़े जिला पंचायत सदस्य मुद्दों को लेकर धरने पर बैठ गये और मीटिंग का बहिष्कार कर दिया।
जैसे-तैसे मीटिंग शुरू हुई। मीटिंग में दूसरे क्रम में स्वास्थ्य विभाग का मुद्दा था। इसमें जिला पंचायत सदस्य पीसी गोरखा ने बात रखना शुरू की। जिला पंचायत अध्यक्ष सुमित्रा प्रसाद का कहना है कि इसी दौरान सीएमओ जिला पंचायत सदस्यों के लैटर पैड के वजूद और उपयोगिता को लेकर अनर्गल बात करने लगे।
जबकि जन प्रतिनिधियों का कहना था कि ग्राम प्रधान भी इसका इस्तेमाल करते हैं, इसमें कोई भी बात गलत नहीं है। इस मुद्दे पर बात बिगड़ गई। बताया जाता है कि तकरार में खूब आरोप- प्रत्यारोप और तीखी बात कही गई।
जन प्रतिनिधियों ने सीएम की घोषणा का पैसा रिलीज न होने और अफसरों पर मामले को लटकाने और जन प्रतिनिधियों को टरकाने का आरोप लगाया।
बाद में नाराज अफसरों ने मीटिंग का बहिष्कार कर दिया। वे डीएम कैंप कार्यालय पहुंचे और जिला अधिकारी दीपक रावत को शिकायती पत्र सौंपा। इसमें जिला पंचायत सदस्य हरीश बिष्ट द्वारा अमर्यादित व्यवहार करने के बाद मीटिंग के बहिष्कार की बात कही गई थी।
बाद में जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ जिला पंचायत सदस्य वित्त मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश के घर पर पहुंचे। उन्होंने अफसरों की शिकायत की। इस संबंध में जिला पंचायत सदस्य हरीश बिष्ट का कहना है कि सीएमओ ने मुख्य मुद्दा भटका दिया था।
सीएमओ से कहा था कि सभी जनता के प्रति जवाबदेह हैं और जनता के नौकर हैं।
सभी मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा : डीएम
डीएम दीपक रावत का कहना है कि सभी से मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। जन प्रतिनिधियों और अफसरों के बीच संवाद बहाल कर लिया जाएगा। दोनों के बीच जल्द ही समीक्षा मीटिंग रखी जाएगी, उसमें जो मुद्दे छूट गये हैं उन पर बातचीत होगी।
बोले अफसर, मीटिंग में नहीं करेंगे प्रतिभाग
अफसर लामबंद हो गये हैं। डीएम रावत को जो शिकायती पत्र दिया है। इसमें कहा गया है कि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति होती है, तो सार्वजनिक बैठकों में जनपद स्तरीय अधिकारियों का प्रतिभाग करना संभव नहीं होगा।