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फीस पर महाभारत, शिकायतें सिर्फ नौ

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दीप्ति पब्लिक स्कूल में स्कूलों द्वारा फीस लेने को लेकर जांच करती शिक्षा विभाग की टीम से जानकारी - फोटो : HALDWANI
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हल्द्वानी। ट्यूशन फीस से अधिक और जबरन फीस लेने की शिकायतों की जांच सोमवार से शुरू तो हुई मगर शिकायत करने वाले सिर्फ नौ ही पहुंचे। चार केंद्रों में शिकायतें सुनी गईं। 20 स्कूलों में से सिर्फ पांच स्कूलों की शिकायतें आईं।
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डीएम सविन बंसल के आदेश पर शिक्षा विभाग की चार टीमों ने फीस संबंधी अभिभावकों की शिकायतोें की सुनवाई करने के लिए सोमवार से जांच शुरू कर दी है। मुख्य शिक्षा अधिकारी केके गुप्ता ने बताया कि चार टीमों ने दीप्ति पब्लिक स्कूल, आर्यमान विक्रम बिड़ला स्कूल, क्वींस पब्लिक स्कूल और गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल मेें केंद्र बनाकर 20 निजी स्कूलों की जांच शुरू की। जांच सुबह 11 बजे से अपराह्न 2 बजे तक 11 बिंदुओं पर की गई। सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह ने भी जांच केंद्रों का निरीक्षण किया।
खंड शिक्षा अधिकारी हरेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि शिकायतों का स्कूलों द्वारा दी गई सूचना व अभिलेखों का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद जांच रिपोर्ट मुख्य शिक्षा अधिकारी के माध्यम से डीएम को भेजी जाएगी। जांच टीम में खंड शिक्षा अधिकारी भाष्करा नंद पांडे, उपशिक्षा अधिकारी अमित कुमार चंद, चक्षुपति अवस्थी, कलेश्वरी मेहता, जीआईसी के प्रधानाचार्य मधुसूदन मिश्र, किशन चंद्र लोहनी, सुरेंद्र सिंह रौतेला, बलवंत सिंह मनराल, जेपीएन सिंह, बंशीधर अंडोला, प्रयाग सिंह रावत, मनोज कुमार उप्रेती शामिल थे।
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इन स्कूलों की आईं शिकायतें
आर्यमान विक्रम बिड़ला स्कूल 01
यूनिवर्सल सीनियर सेकेंडरी स्कूल 03
सरस्वती एकेडमी 01
एसकेएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल 01
स्कालर्स होम सीनियर सेकेंडरी स्कूल 03
कई स्कूलों ने नहीं दिए फीस के अभिलेख
हल्द्वानी। शिक्षा विभाग की ओर से निर्धारित फार्मेट पर फीस का ब्योरा मांगने के बावजूद कई स्कूलों द्वारा अभिलेख जांच टीम के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए गए। एक बड़े स्कूल ने स्टाफ न होने का कारण बता दिया तो किसी ने एक सादे कागज पर फीस का ब्योरा अंकित करा दिया। बाद में बीईओ हरेंद्र मिश्र की फटकार के बाद स्कूलों ने फीस के अभिलेख भेजे। कुछ स्कूलों ने अपने प्रधानाचार्य भेजने के स्थान पर अपने आफिस क्लर्क को ही भेज दिया।
दो-दो पुलिस कर्मी रहे तैनात
हल्द्वानी। जांच केंद्रों पर किसी तरह की अव्यवस्था न फैले, या कोई प्रदर्शन करने न पहुंच जाए इसके लिए चारों केंद्रों पर दो-दो पुलिस कर्मी तैनात किए गए थे।
अभिभावकों ने नहीं दिखाई रुचि
हल्द्वानी। शहर में जिस तरह से फीस को लेकर कई दिनों से शोर मचा था उस हिसाब से शिकायतें नहीं आईं। एक दो स्कूलों को छोड़ दें तो किसी भी स्कूल की कोई बड़ी शिकायत नहीं आईं। बीईओ हरेंद्र मिश्रा ने कहा कि शिकायत कर्ताओं के नाम हरहाल में गोपनीय रखे जाने के बात थी इसके बाद भी अभिभावक सामने नहीं आए।
पीएसए का पक्ष
किसी भी स्कूल में अधिक फीस लेने संबंधी कोई अनियमितता सामने नहीं आई। जो शिकायतें आईं हैं उन पर जांच के बाद ही शिक्षा विभाग बताएगा कि शिकायत सही हैं या गलत है। 80 फीसदी अभिभावकों ने फीस ही जमा नहीं की है तो अधिक फीस लेने की बात कहां से आएगी। कुछ ऐसे अभिभावक शिकायत करने आए हैं जिन्होंने पिछले सत्र की फीस भी जमा नहीं की है। प्रशासन से अनुरोध है कि फीस बकाएदार अभिभावकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। -कैलाश भगत, अध्यक्ष, पब्लिक स्कूल एसोसिएशन
आज इन केंद्रों पर होगी जांच
जांच केंद्र स्कूल
निमोनिक कॉन्वेंट स्कूल : एबीएम स्कूल फतेहपुर, निमोनिक कॉन्वेंट, द हैरिटेज स्कूल, व्हाइट हॉल स्कूल, द सनबीम स्कूल।
इंस्पिरेशन पब्लिक स्कूल : सेंटपॉल स्कूल, नैनी वैली, निर्मला कॉन्वेंट, इंस्पिरेशन स्कूल और सेंट थेरेसा स्कूल।
दून पब्लिक स्कूल : हिमालय विद्या मंदिर आवास विकास, टिक्कू मॉर्डन स्कूल, ऑरम द ग्लोबल स्कूल, दून पब्लिक स्कूल, केवीएम पब्लिक स्कूल।
एवरग्रीन पब्लिक स्कूल : रैनबो पब्लिक स्कूल, बीएलएम एकेडमी, हिमालया सीनियर सेकेंडरी स्कूल गौजाजाली, डॉन बॉस्को स्कूल, एवरग्रीन पब्लिक स्कूल।
प्रशासन की जांच के तरीके पर उठाए सवाल
हल्द्वानी। जिला प्रशासन द्वारा स्कूलों की कराई जा रही जांच के तरीके पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जांच केंद्रों पर शिकायत करने आए अभिभावकों का कहना था कि जिन की शिकायत है उनके यहां ही जांच स्थल बना दिया गया है। कोई भी अभिभावक स्कूल के प्रधानाचार्य के सामने शिकायत करने कैसे आएगा, बच्चे के भविष्य को कौन दांव पर लगाएगा। जबकि होना यह चाहिए था कि शिकायत गोपनीय होनी चाहिए थी और जांच केंद्र निजी स्कूल के स्थान पर सरकारी स्कूलों को बनाया जाना चाहिए था।
इस प्रकार की शिकायतें
अभिभावकों की शिकायत थी कि एक स्कूल की ओर से पिछले साल जो फीस ली जा रही थी, कोरोना काल में भी उतनी ही फीस वसूल रहा है। एक स्कूल की शिकायत थी कि फीस के लिए दबाव बनाया जा रहा है। ट्यूशन फीस की जानकारी नहीं दी गई। फीस जमा न करने पर बच्चे की ऑनलाइन क्लास बंद कर दी। एक अभिभावक की शिकायत थी कि स्कूल फीस बढ़ाने के साथ ही स्कूल कंप्यूटर चार्जेज भी ले रहा है।
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