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खच्चरों से ‘सुरक्षा चक्रव्यूह’ भेद रहे माफिया

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हल्‍द्वानी गौलापार के ‌गोविंद ग्राम के निकट गौला नदी में खनन करते युवक। अमर उजाला
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हल्द्वानी। गौला नदी में कहने को वन विभाग ने खनन गेटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं, लेकिन माफिया खच्चरों से वन विभाग के सुरक्षा चक्रव्यूह को भेद रहे हैं। इस समय अवैध खनन का अड्डा गौलापार का गोविंद ग्राम बना हुआ है। यहां पर एक दिन में 50 से अधिक खच्चरों से माफिया रेत-बजरी एकत्र कर रहे हैं। इसके बाद यहां से खनन माफिया डंपरों से इसे ठिकाने लगा रहे हैं।
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गौला नदी में 12 खनन गेट हैं। बरसात के कारण वन विभाग ने इन गेटों को बंद किया है। अब एक अक्तूबर से खनन सत्र शुरू होगा। गौला नदी के गेटों को वन विभाग ने बंद करने के साथ निकासी के दूसरे रास्तों पर गहरे गड्ढे खोदे हैं। इसके बाद भी वन विभाग अवैध खनन के रास्तों को बंद नहीं कर सका है। नतीजतन गौलापार से गौला नदी में अवैध खनन जारी है।
50 खच्चरों से रोजाना निकाली जा रही है रेत
गोविंद ग्राम में 50 खच्चरों से रोजाना रेत निकाली जाती है। खच्चर वाले को डंपर स्वामी एक चक्कर में 100 रुपये देते हैं। एक खच्चर वाला एक दिन में करीब 10 चक्कर लगाता है। सभी खच्चर वाले मिलकर चार डंपर के करीब रेत रोजाना एकत्र करते हैं। नदी में कुछ लोग आरबीएम से रेत को अलग करते मिल जाएंगे।
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गौला नदी से गोविंद ग्राम को जोड़ता है सुरंग जैसा रास्ता
माफिया ने गौला पार के गोविंद ग्राम से नदी को जोड़ने के लिए एक सुरंग जैसा रास्ता बनाया है। इसी रास्ते से गौला नदी से खच्चरों से रेत लाकर गांव में सड़क किनारे एकत्र किया जाता है। यहां से मौका देखकर डंपरों से रेत भेज दी जाती है। दरअसल यह रास्ता गांव के नक्शे में शामिल है। इसी कारण वन विभाग इसे बंद भी नहीं करा पाता है।
गोविंद ग्राम में अवैध खनन की जानकारी नहीं है। यहां पर टीम भेजकर अवैध खनन की जांच कराई जाएगी। जो भी अवैध खनन करते मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. शालिनी जोशी, रेंजर छकाता
अवैध खनन में डंपर और घोड़ा-बुग्गी सीज
हल्द्वानी। गौला रेंज की टीम नेे मुखबिर की सूचना पर एक डंपर और एक घोड़ा बुग्गी को राजपुरा में सीज किया है। इसमें बिना किसी दस्तावेज के रेत ले जाई जा रही थी। इधर, टीम ने शांतिपुरी में छापा मारा। यहां पर डंपर (यूके 04-सीए-8706) को जांच के लिए रोका। उसमें रेत भरी मिली। डंपर में दस्तावेजों में दर्ज मात्रा से अधिक 130 क्विंटल उप खनिज लदा था। टीम में वन दरोगा वीरेंद्र सिंह परिहार, धर्मानंद पाठक, कैलाश कपिल, रजत पालीवाल, दलीप सिंह मेवाड़ी, चंद्रशेखर भट्ट आदि थे।
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