मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी तंदुरुस्ती का राज रविवार को आखिरकार सार्वजनिक कर ही दिया। उन्होंने कहा कि वह नियमित रूप से मडुवा और बाजरे की रोटी खाते हैं और स्वस्थ हैं।
बताया कि मडुवा और बाजरे की रोटी खाकर ही उन्होंने अपनी गर्दन ठीक कर ली। मुख्यमंत्री ने शहरी लाइफ स्टाइल जीने वालों को भी परंपरागत मोटा अनाज खाने की सलाह दी।
कहा कि शहरी लोग लंबी जिंदगी चाहते हैं तो बाजरा और मडुवा की रोटी और झिंगुर की खीर जरूर खाएं। कृषक महोत्सव में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है।
दुनिया में हम गेहूं उत्पादन में दूसरे तो चावल उत्पादन में पहले नंबर पर हैं। कपास का उत्पादन भी पहले नंबर पर होता है। बावजूद इसके बेहतर जीवन शैली के लिए गांवों से शहरों में पलायन बढ़ा है।
इससे हमारी परंपरागत एवं जैविक खेती खत्म होने की कगार पर है। उत्तराखंड भी इसमें शामिल है। उन्होंने कहा कि देरसबेर लोगों को परंपरागत मोटे अनाज और जैविक उत्पादों की तरफ आना ही होगा। तब बाजार होगा लेकिन अनाज नहीं मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार परंपरागत और जैविक खेतीबाड़ी को बढ़ावा दे रही है। परंपरागत अनाजों का समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है, ताकि काश्तकार अधिक से अधिक उत्पादन करें।
उनके उत्पादों के लिए मार्केट मुहैया कराया जा रहा है। यहां तक कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार भी टटोल रहे हैं। फूड फेस्टिवलों में परंपरागत अनाज के स्टाल लगाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि वह नियमित रूप से मोटा अनाज खाते हैं। मडुवा और बाजरे की रोटी, गहत की दाल, कौणी का भात और झिंगुर की खीर खासकर ही स्वस्थ हैं।
गर्दन टूटने पर लोग इलाज के लिए उन्हें अमेरिका जाने की सलाह देते रहे। मडुवा और बाजरे की रोटी खाकर ही उन्होंने अपनी गर्दन ठीक कर ली।
उन्होंने कहा कि शहरी लोग मोटा अनाज जरूर खाएं, ताकि वे लंबी जिंदगी जी सकें और काश्तकारों को उनके उत्पादों का बाजार मिल सके।
उन्होंने कहा कि शहरों में रहने वाले घर के आंगन में एक गमले में अमरूद का पेड़ ही लगाकर परिवार में आयरन की कमी दूर कर सकते हैं।