हल्द्वानी। कुमाऊं के सबसे बड़े सुशीला तिवारी अस्पताल और सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल में वर्षों पुरानी मशीनों के सहारे काम चल रहा है। मशीनें भगवान सहारे हो गई है और मरीज राम भरोसे है।
राजकीय मेडिकल कालेज के अधीन आने वाले सुशीला तिवारी अस्पताल में सीटी और एमआरआई की मशीन वर्ष 2007 में लगी थी। मशीन की हालत यह हो गई है कि एक वर्ष में तीन से चार बार खराब हो जाती है। मशीनें खराब होने के कारण मरीजों को बाहर से महंगे दरों में एमआरआई और सीटी कराना पड़ता है। सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल के तो हाल और बुरे हैं।
सीटी स्कैन मशीन डायरेक्ट बिजली के कनेक्शन से चल रही है। मशीन के लिए 40 बैटरी खरीदी जानी है ताकि बैकअप मिल सके। डायरेक्ट बिजली से चलने के कारण मशीन फुंकने का खतरा बना हुआ है। एक्सरे मशीन का तो भगवान ही मालिक है। टूट-फूटे प्रोसेसर को बांधकर काम चलाया जा रहा है। बात अगर अल्ट्रासाउंड मशीन की हो तो उसके लिए यूपीएस की दरकार है। खास बात यह है कि आर्थो पेंटो ग्राम मशीन (दांतों के लिए) पिछले एक वर्ष से खराब पड़ी है।
मशीनों के बारे में प्रस्ताव बनाकर डीएम को दिया गया है। जल्द ही मशीनों की हालत सुधरने की संभावना है। × डॉ. हरीश लाल, सीएमएस बेस अस्पताल
एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन के बारे में रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। दोनों ही मशीनें नई खरीदने की आवश्यकता है। मशीनों को लेकर शासन में बात चल रही है। × डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कालेज