बारिश की मार सब्जियों पर भी पड़ी है। मैदानी क्षेत्रों से आवक कम होने से सब्जियों के दाम बढ़ गये हैं। एक वक्त की सब्जी खाना भी आम लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है। इस सीजन की सब्जी लौकी, तोरई, बैगन और कद्दू तक 30 रुपये किलो से नीचे नहीं उतर रहे हैं।
टमाटर 40 रुपये किलो पर लाल है। पहाड़ से आने वाली सब्जियां तो और भी महंगी हैं। पिछले सालों तक 10 से 15 रुपये किलो बिकने वाला पहाड़ी आलू इस बार 30 रुपये किलो से नीचे नहीं उतरा है।
पहाड़ की फूलगोभी 70 से 80 रुपये किलो बिक रही है, जबकि पहाड़ की मूली 20 से बढ़कर 30 रुपये किलो हो गई है। हरा धनिया 100 रुपये किलो से सीधे 150 रुपये किलो पर पहुंच गया है। सब्जियों का विकल्प समझी जाने वाली दालें भी भाव खा रही हैं। अरहर 150 रुपये और मलका 85 रुपये किलो है।
अक्तूबर के बाद ही मिलेगी राहत
सब्जी सस्ती होने के फिलहाल दो महीने तक आसार नहीं हैं। सब्जी विक्र्रेताओं की मानें तो अक्तूबर के बाद ही सब्जियों के दाम गिरेंगे। अक्टूबर से हरी सब्जियां शुरू होने के साथ ही सर्दियों की सब्जियां भी आने लगेंगी। बरसात खत्म होने के बाद आलू और गोभी की भी आवक बढ़ जाती है।
एक-दो दिन में टमाटर के रेट उतरेंगे
नासिक का टमाटर मंडी में आना शुरू हो गया है। एक दो दिन में टमाटर के रेट में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि हल्द्वानी मंडी में गौलापार का टमाटर शुरू होने के बाद इसके दाम पांच से दस रुपये किलो में आ जाते हैं। गौलापार का टमाटर 15 नवंबर के बाद ही शुरू होगा।
पालेज की सब्जियों को नुकसान
नदी के किनारे लौकी, तोरई और कूद्दू की फसल बहुतायत होती है। बारिश और नदियों में पानी बढ़ने से इन सब्जियों को नुकसान पहुंचा है। इससे मंडी में सब्जियों की आवक कम हुई है।बरसात में हर बार पालेज की फसल को नुकसान होता है। इस बार यह नुकसान कुछ ज्यादा हुआ है।
गली मोहल्ले के रेट अलग-अलग
सब्जी के रेट हर गली मोहल्ले के अलग हैं। मंगलपड़ाव सब्जी मंडी में लौकी 20 रुपए किलो तो देवलचौड़ में यह सब्जी 25 रुपये किलो बिक रही है। मंगलपड़ाव में भिंडी 20 रुपये किलो तो देवलचौड़ में 30 रुपये किलो बिक रही है। इसी प्रकार अन्य सब्जियों के दाम में भी पांच से दस रुपये का अंतर है।