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तिब्बतियों ने नव वर्ष के बाद पहली पूर्णिमा पर अनुष्ठान किए

Mon, 13 Mar 2017 12:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल। 
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नैनीताल में लोसर - फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल। तिब्बतियों ने नव वर्ष (लोसर) के बाद आई पहली पूर्णिमा पर रविवार को सुख निवास स्थित बौद्घ मठ में कई धार्मिक अनुष्ठान किए। इस दौरान जहां एक ओर उन्होंने भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष विशेष पूजा अर्चना की तो दूसरी ओर सामूहिक रुप से नगर, प्रदेश और विश्वशांति के लिए प्रार्थना भी की। अनुष्ठानों के चलते आधे दिन तक तिब्बतियों ने अपने प्रतिष्ठान भी पूर्ण रूप से बंद रखे।
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सुबह करीब नौ बजे तिब्बती समुदाय के लोग बौद्ध मठ में एकत्र हुए। मुख्य पुजारी गैसे कुनछुक ने पूर्णिमा के मौके पर सामूहिक पूजा कराई। इस दौरान भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर मार्ल्यापण कर पूजा अर्चना की गई। करीब दो घंटे तक चली पूजा के दौरान विश्वशांति के लिए दीये भी जलाए गए। इस मौके पर सभी ने देश में कोई आपदा न आए इसके लिए भी प्रार्थना की। कार्यक्रम में ऐशी थुप्तैन, कैलसंग छुकी, सिरिंग तोपगिल, तेनजिंग छुपिल, तेनजिंग जिगमे, सेरिंग पेलकी आदि थे। 

नैनीताल। तिब्बत की आजादी की मांग को लेकर दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में भाग लेने के लिए नैनीताल से भी तिब्बती महिलाओं का शिष्टमंडल तिब्बती महिला संगठन की अध्यक्ष सांगमों के नेतृत्व दिल्ली गया है।
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 बीते 10 मार्च को तिब्बतियों ने नैनीताल में तिब्बत की आजादी की मांग को लेकर नैनीताल में जुलूस निकाला था,12 मार्च को भी महिलाओं का जुलूस प्रस्तावित था लेकिन प्रशासन की ओर से जुलूस की अनुमति नहीं मिलने पर तिब्बती महिलाएं दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में भाग लेने के लिए रवाना हो गई।

10 मार्च 1959 को पहली बार हजारों तिब्बतियों ने तिब्बत की राजधानी लहासा में चीन के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। इस दौरान वह धर्मगुरु दलाईलामा की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरे थे। 12 मार्च 1959 को तिब्बती महिलाओं ने ठीक इसी तरह का आयोजन किया  था। सांगमों ने कहा कि तिब्बत की आजादी की मांग को लेकर यह 58वां वर्ष है। 
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