नैनीताल। पर्यटन के चलते सालभर गुलजार रहने वाला नैनीताल लॉकडाउन के बाद से वीरान पड़ा है। हालांकि वीरानी के बीच एक सुखदायी खबर यह है कि नगर की शान नैनीझील की सेहत जलस्तर और प्रदूषण के लिहाज से दुरुस्त हुई है। साथ ही जैव विविधता पर भी अनुकूल असर पड़ा है।
पर्यावरणविद डॉ. अजय रावत का कहना है कि लॉकडाउन के कारण न तो स्थानीय लोग घरों से ही शहर में सैलानी आ रहे हैं। वाहनों की आवाजाही काफी कम होने से प्राकृतिक जलस्रोत और नैनीझील प्रदूषित होने से काफी हद तक बच रही है। डॉ. रावत कहते हैं कि किलबरी रोड, पाइंस रोड, हनुमानगढ़ी और मनोरा क्षेत्र से सटे जंगलों में अवैध कटान बंद हो गया है। पशु-पक्षियों के शिकार के मामले भी नहीं आ रहे हैं। इससे जैव विविधता का भी संरक्षण हो रहा है। वहीं, पिछले साल की तुलना में झील का जलस्तर दो फुट से ज्यादा बढ़ा है। वर्ष 2019 के पहले सप्ताह में झील का जलस्तर साढ़े चार फुट था, जो वर्तमान में साढ़े छह फुट पहुंच गया है।
माल रोड पर घटना वाहनों का दबाव
अप्रैल का पहला हफ्ता नैनीताल के लिए पर्यटक सीजन की तैयारियों वाला रहता था। नाव चालकों से लेकर होटल व्यवसायी तक सीजन की तैयारियों में जुटे जाते थे। लाखों सैलानी यहां सीजन में पहुंचते थे। प्रतिदिन शहर में तीन से चार हजार वाहनों का प्रवेश होता था। इससे प्रदूषण बढ़ने के साथ सड़कों पर वाहनों का दबाव रहता था। इस कारण लोअर माल रोड भी समय-समय पर दरकते रहते थी। फिलहाल माल रोड पर आवाजाही न के बराबर है। लॉकडाउन के चलते इस साल माल रोड पर वाहनों का दबाव निश्चित कम हुआ है।
लॉकडाउन के चलते स्थानीय लोगों और सैलानियों की आवाजाही नहीं हो रही है। ऐसे में निश्चित रूप से नैनीताल की हवा शुद्ध हुई होगी और झील का प्रदूषण भी घटा होगा। विभाग की ओर से आज भीमताल, कोसी और गौला नदी के पानी में प्रदूषण की जांच की जाएगी।
-आरके चतुर्वेदी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड