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स्थानीय मुद्दे गायब, अब व्यक्तिगत छवि का सहारा

Tue, 14 Feb 2017 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल
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सहारनपुर विधानसभा सीट का इतिहास - फोटो : SELF
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नैनीताल। चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद स्थानीय समस्याएं कोई मुद्दा न बन पाने के कारण नैनीताल विधानसभा के प्रत्याशियों की हार जीत अब उनकी व्यक्तिगत छवि पर निर्भर हो गई है। नैनीताल विधानसभा क्षेत्र में पेयजल, सड़कें, स्वास्थ्य, शिक्षा, पार्किंग और यातायात समेत कई समस्याओं होने के बावजूद ये समस्याएं कोई मुद्दा नहीं रहीं।
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  भाजपा मुख्यत: मोदी के नाम पर और कांग्रेस भाजपा द्वारा कांग्रेस सरकार को सहयोग न करने के बावजूद प्रदेश में विकास कार्यों के नाम पर वोट मांगती नजर आई। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर लाउडस्पीकर के माध्यम से किए जाने वाले प्रचार में भी स्थानीय मुद्दे गौण रहे। लाउडस्पीकर से किए जाने वाले प्रचार में भाजपा के गीतों में तो केवल मोदी का ही नाम हावी रहा। लोगों का तो यहां तक कहना है कि वह मतदान करते वक्त प्रत्याशियों के चेहरे, मोहरे और मुस्कुराहट को भी तवज्जो देंगे।  
 ऐसे में चुनाव में कांग्रेस की सरिता आर्या, भाजपा के संजीव आर्य और भाजपा के बागी हेम आर्या के बीच मुकाबला उनकी व्यक्तिगत छवि और संपर्क के बूते ही होना है। संजीव आर्य को जहां अपनी सौम्य छवि और वरिष्ठ राजनीतिज्ञ पिता यशपाल आर्य के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभाव का लाभ मिल रहा है।
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  वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की सरिता आर्या को भी मधुर और मिलनसार व्यवहार, आसान पहुंच और नगर क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क का लाभ है। सरिता के पक्ष में व्यापार मंडल नैनीताल के अध्यक्ष किशन सिंह नेगी, मारूति नंदन साह, भवाली के नरेश पांडे समेत सरकारी कर्मचारियों और मुस्लिम समुदाय का समर्थन मिल रहा है।
भाजपा के बागी हेम आर्या भी लगातार नगर व ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के सरोकारों से जुड़े हैं और उनके साथ तमाम वर्गों की सहानुभूति भी है। संजीव आर्य को यशपाल आर्य द्वारा मुक्तेश्वर विधानसभा से विधायक रहने के दौरान बेतालघाट में किए गए गए कार्यों का लाभ मिल सकता है। 
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