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नालियों से मंजीत का परिवार चलाता है अपनी आजीविका

Sat, 08 Jul 2017 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो रामनगर
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नालियों से चलाती है आजीविका - फोटो : अमर उजाला
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रामनगर (नैनीताल)। पेट पालने के लिए हर कोई किसी न किसी माध्यम से कमाता है, लेकिन बरसात के दिनों में अच्छे अच्छे कारोबारियों के धंधे मंदे पड़ जाते हैं। ऐसे में डोईवाला देहरादून के रहने वाले मंजीत का धंधा जोर पकड़ने लगता है।
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दरअसल मंजीत डंडे में चुंबक फंसा गहरी-गहरी नालियों में लोहे के कबाड़ को ढूंढकर कबाड़ियों को बेचता है। इससे परिवार का भरण पोषण होता है। मंजीत के साथ उनका पूरा परिवार भी इस काम को करता है।

 मंजीत ने बताया कि पेट पालने और ईमानदारी से काम करने में क्या शर्म। वह रोज सुबह से शाम तक नालियों-नालियों घूमकर चुंबक के सहारे कबाड़ को निकालते हैं। वह तीन डिब्बों में अलग-अलग नालियों से मिली धातुओं को रखते हैं।
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वे लोहे के अलावा पीतल और एल्युमीनियम भी एकत्र कर कबाड़ियों को बेचते हैं। इसमें वे पांच से सात सौ रुपये तक कमा लेते हैं। लेकिन बरसातों में नालियों में ज्यादा मलबा इकट्ठा हो जाता है और उसमें धातु नीचे बैठ जाती है। इससे धातु भी ज्यादा निकलती है, जिससे 1000 से 1500 रुपये तक की कमाई हो जाती है। 

रामनगर(नैनीताल)। नालियों से धातु खोजने वाले मंजीत ने बताया कि उनका धातु ढूंढते समय कई बार सांप कीड़ों से भी सामना हो जाता है। कई बार ब्लेड और धारदार धातुओं से हाथ तक कट जाता है। हमारा तो भगवान ही मालिक रहता है। इस काम के लिए वे कोटद्वार, हरिद्वार, ऋषिकेश और रामनगर तक ही नालियों से धातु खोजबीन कर अपना धंधा चलाते हैं। साथ ही धर्मशालाओं में रहते हैं।       
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