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वर्तमान सामाजिक संदर्भ औैर हिंदी कविता विषय पर रामगढ़ में हुई संगोष्ठी

Thu, 31 Mar 2016 01:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, भीमताल (नैनीताल)।
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साहित्य समागम - फोटो : अमर उजाला
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भीमताल (नैनीताल)। कविता सदैव अपने सामाजिक परिवेश से प्रभावित रही है। आधुनिक कविता में भविष्य के समाज की स्पष्ट तस्वीर देखी जा सकती है। अब कविता सिर्फ कविता के लिए नहीं बल्कि वह गहरे दायित्व बोध की सार्थक अभिव्यक्ति है। सामाजिक विसंगतियों के विरुद्ध वह अपना आक्रोश ही व्यक्त नहीं करती अपितु चेतना जाग्रत कर अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का भी निर्वाह करती है।
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यह विचार बुधवार को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार मंगलेश डबराल ने कुमाऊं विवि नैनीताल की रामगढ़ स्थित महादेवी वर्मा सृजन पीठ में कवियत्री महादेवी वर्मा के 109वें जन्मदिन के मौके पर वर्तमान सामाजिक संदर्भ औैर हिंदी कविता विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किए। अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुविवि के कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2005 में विवि के तहत महादेवी वर्मा सृजन पीठ की स्थापना जिस उद्देश्य को लेकर की गई थी पीठ उसी दिशा में लगातार प्रयासरत है। 

समालोचक डा. साधना अग्रवाल ने कहा कि कविता जीवन के यथार्थ की सशक्त अभिव्यक्ति है। समीक्षक डा. सिद्धेश्वर सिंह ने कहा कि किसी भी भाषा की शक्ति का अंदाज बिल्कुल नए कवियों की भाषा से लगाया जा सकता है। उत्तराखंड मुक्त विवि के हिंदी विभागाध्यक्ष डा.शशांक शुक्ला ने कहा कि पुस्तकों के बजाय इंटरनेट व ब्लाग जैसे माध्यमों के जरिए लोकप्रिय हो रही कविता भाषा और विन्यास की सीमा से परे बिल्कुल एक नए प्रयोग की तरह है जो बहुत कम शब्दों में अपनी गहरी छाप छोड़ सकती है।
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युवा कवि डा. अनिल कार्की ने कहा कि हिंदी कविता के आयाम बहुत व्यापक हैं।  डा.मन्नू ढौडियाल ने कहा कि हिंदी में स्त्री विमर्श की शुरुआत का श्रेय भी महादेवी वर्मा को जाता है। पीठ के निदेशक प्रो.देव सिंह पोखरिया ने कहा कि पीठ को उत्तराखंड की साहित्यिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप मेें विकसित करने के प्रयास किये जा रहे हैं।

संचालन पीठ के शोध अधिकारी मोहन सिंह रावत ने किया। प्रतियोगिताओं के विजेताओं दिव्या पाठक, शालनी सागर, पवनेश ठकुराठी ,बीना जोशी व सुधा जोशी को अतिथियों ने पुरस्कृत किया। दूसरे सत्र में राजेश सकलानी, रेखा चमोली, गीता गैरोला, स्वाति मेलकानी, किरण अग्रवाल, प्रो.दिवा भट्ट, खेमकरण सोमन, दिनेश उपाध्याय, डा.दीपा कांडपाल, प्रो.जगत सिंह बिष्ट, ममता पंत, महेश कुमार वर्मा ने कविता पाठ किया। 
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