फिल्म और राजनीति में समान रूप से लोकप्रिय रहे विनोद खन्ना के अचानक दुनिया को अलविदा कह देने से उनके चाहने वालों में गम की लहर है। उनसे उम्र में काफी बड़े कलाकार अभी फिल्मों में सक्रिय हैं।
ऐसे में उनका असमय चले जाना और भी त्रासद है। विनोद का नैनीताल से काफी लगाव रहा था और जब बतौर निर्माता अपनी पहली फिल्म बना कर अपने पुत्र अक्षय की फिल्मों में लांचिंग की तो उसकी अधिकांश शूटिंग नैनीताल और उत्तराखंड में की थी।
फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ के गीत जिंदगी तो बेवफा है... में भले ही वे क्षण भर को नजर आए थे, पर असल जिंदगी में वह इस गीत को सार्थक कर गए। 1997 में 4 अप्रैल को रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘हिमालय पुत्र’ की शूटिंग 1996 में मई में नैनीताल में हुई थी।
फिल्म के दृश्य राजभवन, बोट क्लब, नैनी झील, सेंट जोसेफ कॉलेज में फिल्माए गए थे। फिल्म में अक्षय के साथ अंजलि झावेरी ने भी डेब्यू किया था। शूटिंग के लिए विनोद, हेमा मालिनी, अक्षय और अंजलि यहां आए थे और राजभवन में ही ठहरे थे।
विनोद का व्यवहार आम लोगों और पत्रकारों के साथ बेहद दोस्ताना था। शूटिंग के दौरान उन्होंने फिल्म के सभी कलाकारों से भी पत्रकारों को मिलवाया था। उनकी दूसरी पत्नी कविता भी उनके साथ थीं।
इस दौरान वार्ता में विनोद ने 1982 से 1987 तक के अपने अनुभव साझा करते हुए स्वीकारा था कि अपने करियर के पीक पर रहते हुए उनका संन्यास ले लेना गलत निर्णय रहा। इसका उनके फिल्मी और पारिवारिक जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ा।
उन्होंने बेहद शालीनता से स्वीकारा था कि अमेरिका जाकर ओशो के माली बन कर उनका बगीचा संवारने की धुन में उनका अपना बाग उजड़ गया और 1985 में पत्नी गीतांजलि से तलाक हो गया।
विनोद ने अपनी पत्नी कविता से मिलवाते हुए बेहद सादगी से अपने राज शेयर करते हुए कहा था कि तलाक के बाद उन्हें विवाह के दर्जनों ऑफर मिले, लेकिन दिल अंतत: कविता दफ्तरी से जुड़ा और 1990 में उनसे विवाह कर लिया।
उस मौके पर विनोद ने यह भी कहा था कि वे संन्यास में न गए होते तो आज अमिताभ बच्चन के समकक्ष सफल होते। ‘हिमालय पुत्र’ फिल्म में वह सूरज नाम के इंस्पेक्टर की भूमिका में थे, जिसका अपनी पत्नी सीमा (हेमा मालिनी) के साथ गलतफहमी के चलते अलगाव हो गया।
यह कहानी काफी कुछ उनकी निजी जिंदगी से प्रेरित थी। विनोद के प्रशंसकों की तादाद बहुत ज्यादा रही और यूं अचानक उनके जाने पर फिल्म चांदनी में उन पर फिल्माया गीत लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है ... ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है। फर्क इतना है कि ये सावन की झड़ी अबकी बार उनके प्रशंसकों की आंखों से है।