नशे की चपेट में मासूम
अस्पताल से मिले आंकड़ों पर नजर डालें तो हर महीने 30-35 लोग नशा छुड़ाने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर भी 8-10 बच्चे ऐसे मिले हैं जो घरेलू हिंसा, माता-पिता के झगड़े या उपेक्षा से तंग आकर घर छोड़ चुके हैं और नशे की गिरफ्त में हैं।
कच्ची उम्र में प्यार का धोखा, स्मैक की गिरफ्त में युवतियां
बेस अस्पताल में तैनात किशोर स्वास्थ्य काउंसलर सुनैना बिष्ट के मुताबिक, 10 से 19 साल तक के युवाओं की काउंसलिंग में जो सच सामने आया, वह डराने वाला है। हर महीने 7-8 केस ऐसे आ रहे हैं जिनमें टीन एजर्स स्मैक या अन्य नशे की लत के चलते अपनी अस्मत तक गंवा बैठते हैं। छोटी उम्र में रिलेशनशिप में पड़कर धोखा खाने के बाद अवसाद और चिड़चिड़ापन उनके व्यवहार में देखने को मिल रहा है।
पत्नियों की ‘हाई डिमांड’, पति अवसाद में
रिश्तों में कड़वाहट का एक नया कारण हाई स्टेटस मेंटेन करने का दबाव भी बन रहा है। काउंसलर सुनैना के अनुसार, महंगी गाड़ियों, ऊंचे खर्चों और दिखावे की जिंदगी ने रिश्तों में तनाव बढ़ा दिया है। कई मामलों में पति, पत्नी की अधिक डिमांड और कठोर स्वभाव से इतना परेशान हो जाता है कि आत्महत्या तक करने की सोचने लगता है।
सीडब्ल्यूसी बना नौनिहालों का पालनहार
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में 362 मामले दर्ज हुए, जिनमें से 19 मामले पॉक्सो के तहत दर्ज किए हैं। ये तो सिर्फ वे केस हैं जो सामने आए, लेकिन अनगिनत ऐसे हैं, जो समाज और लोकलाज के डर से दफन होकर रह जाते हैं। कमेटी के अध्यक्ष आरपी पंत ने बताया कि जनवरी 2024 से फरवरी 2025 तक 192 बच्चों को वात्सल्य योजना के तहत स्पॉन्सरशिप दी गई, जिससे वे सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ सकें।