‘मैं प्राण कहीं भी छोड़ूूं लेकिन मेरा अंतिम संस्कार नैनीताल जिले की माटी में ही हो। इसके लिए मेरे शव को यहां तक लाने के लिए भले ही कितनी ही महंगी टैक्सी बुक करनी पड़े’।
यही अंतिम इच्छा थी साहित्यकार और कथाकार दयानंद अनंत की जो बुधवार की तड़के इस संसार को हमेशा के लिए छोड़कर चले गए। स्व. अनंत के निधन से साहित्य को जो क्षति हुई है उसकी भरपाई संभव नहीं है।
स्व. दयानंद अनंत को नैनीताल से इतना अधिक प्रेम था कि वर्ष 1993 में उन्होंने भवाली के समीप कहलक्वीरा में एक छोटा सा मकान बनवाया। मूल रूप से चौखुटा पौड़ी के रहने वाले स्व. अनंत वर्ष 1997 से वह लगातार यहां रह रहे थे।
पूर्णानंद ढौडियाल और सावित्री देवी के घर 14 जनवरी 1929 को जन्मे स्व. अनंत सक्रिय लेखक, संपादक और सामाजिक चिंतक रहे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गोशाला स्थित प्राथमिक विद्यालय नैनीताल और सीआरएसटी नैनीताल से हुई।
तत्पश्चात उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। बचपन से ही उन्हें लेखन के प्रति विशेष आकर्षण था। उनकी कई रचनाएं दूरदर्शन पर भी प्रसारित हुई और कई कहानियों का मंचन भी हुआ। वर्ष 1980 के दशक में स्व. अनंत पर्वतीय टाइम्स से भी जुड़े।
उनकी पत्नी उमा अनंत ने बताया कि स्व. अनंत को नैनीताल से बेहद प्रेम था। यही कारण था कि उन्होंने घर भी यहीं बनाया और अंतिम इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार नैनीताल के समीप पाइंस स्थित घाट में हो।
उनके निधन पर पुरातत्व वेत्ता डॉ. यशोधर मठपाल, महेश वर्मा अशांत, पालिकाध्यक्ष नीमा बिष्ट, प्रधान नवीन क्वीरा, ब्लाक प्रमुख गीता बिष्ट, संजीव भगत, नंदा देवी कमेटी के अध्यक्ष संजय वर्मा, खष्टी बिष्ट आदि ने शोक जताया है।
एक पुस्तक का नहीं हो सका विमोचन
कथाकार स्व. अनंत के बीमार होने के कारण उनकी एक पुस्तक का विमोचन नहीं हो सका। इस पुस्तक का नाम समग्र कथा साहित्य है। इस पुस्तक में 75 से 80 कहानियां हैं। बीमारी के चलते वह अपनी इस पुस्तक का विमोचन नहीं करा सके।
साहित्य के क्षेत्र में कई बार सम्मानित हुए अनंत
साहित्य के क्षेत्र में नाम कमाने वाले कथाकार स्व. अनंत को जीते जी कई बार सम्मान मिले। 30 अक्तूबर 2011 को उन्हें राम प्रसाद घिल्डियाल पहाड़ी फाउंडेशन इलाहाबाद, 9 नवंबर 2005 को उत्तराखंड संस्कृति साहित्य एवं कला परिषद देहरादून, 14 नवंबर 2010 को पहाड़ रजत सम्मान, 6 जून 2006 को समिति सम्मान, 25 मार्च 2006 को उमेश डोभाल स्मृति सम्मान और वर्ष 2011 में नंदा देवी महोत्सव सम्मान से उन्हें सम्मानित किया गया।