भोर सोसायटी की ओर से होने वाली वार्षिक 30 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यशाला का शुभारंभ पीडब्लूडी गेस्ट हाउस में हुआ। शुभारंभ के बाद उत्तराखंड की संस्कृति से रूबरू होने के लिये छह देशों से पहुंचे सात संस्कृति कर्मी 14 मार्च तक मानिला सल्ट में प्रशिक्षण लेंगे।
भोर सोसायटी के सचिव संजय रिखाड़ी ने बताया प्रोग्राम ऑफ एक्सचेंज इन कल्चर एंड आर्ट्स ऑफ हिमालयाज नामक इस कार्यक्रम का यह तीसरा चरण है।
कार्यशाला के शुभारंभ में पीएनजी महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. अधीर कुमार ने भारतीय कला का सैद्धांतिक पक्ष पर अपना वक्तव्य रखा। उन्होंने कहा भारतीय कला के दो सैद्धांतिक पक्ष है। आचार्य आनंद वर्धन का ध्वनि सिद्धांत, दूसरा भारतीय व्याकरण का स्फोट सिद्धांत।
इन दोनों के संबंध को जाने बगैर कला के क्षेत्र में सफल नहीं हुआ जा सकता। अध्यक्षता करते कवि मथुरादत्त मठपाल ने उत्तराखंड की संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को समझाते हुए लोक कला पर बातचीत रखी।
कार्यशाला में कनाडा से वैलरी जैक्स विलेयर, निकोल स्कोलसर, यूएसए से स्कौट पौनिमन, आस्ट्रेलिया से एलिस चांस, मैक्सिको से इसाबेल मोरिन, कनाडा से जूलिया परंटियू प्रतिभाग कर रहे हैं। इस दौरान नवेंदु मठपाल, अमित तिवारी, मनोज जोशी, राहुल भंडारी मौजूद रहे।