नैनीताल। हाईकोर्ट ने लाल बहादुर शास्त्री राजकीय महाविद्यालय हल्दूचौड़ में प्रांतीयकरण के दौरान हुई नियमविरुद्ध नियुक्तियों व पूर्व कैबिनेट मंत्री के रिश्तेदारों को नियमविरुद्ध नियुक्ति देने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यूजीसी और सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि मानवीय आधार पर नियुक्ति किस प्रकार दे दी गई जबकि राज्य में हजारों योग्य बेरोजगार हैं।
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हल्दूचौड़ निवासी पीयूष जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हल्दूचौड़ महाविद्यालय में प्रांतीयकरण के दौरान उच्च शिक्षा के मानकों को घटाकर बिना नेट क्वालीफाई अयोग्य लोगों को नियुक्ति दे दी गई थी। इस पर राज्य सरकार की ओर से दायर जवाब में कहा गया कि महाविद्यालय के प्रांतीयकरण के दौरान हुईं नियुक्तियों में मानवीय आधार पर छूट दी गई थी। इस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि मानवीय आधार पर नियुक्ति किस प्रकार दे दी गई जबकि राज्य में हजारों योग्य बेरोजगार युवा हैं। कोर्ट ने प्रोफेसर की निर्धारित अर्हता को 55% से घटाकर 40%% करने को योग्यता के मानकों को घटाने पर नाराजगी जताई। कहा कि लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय में नियुक्त सभी प्रवक्ताओं में ऐसे कितने प्रवक्ता हैं जो यूजीसी निर्धारित नेट की अर्हता नहीं रखते। इस संबंध में सरकार को 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है।