दीपावली के दिन धन, संपत्ति की अधिष्ठात्री देवी भगवती महालक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति दीपावली के दिन-रात जागरण करके लक्ष्मी की पूजा करता है, उसके घर लक्ष्मी का निवास होता है। जो आलस्य और निद्रा में रहकर दीपावली को यूं ही गंवाता है उसके घर से लक्ष्मी रूठकर चली जाती हैं।
ज्योतिषियों के मुताबिक ब्रह्म पुराण में कहा गया है कि कार्तिक अमावस्या को अर्धरात्रि के समय लक्ष्मी सद गृहस्थों के घर में विचरण करतीं हैं। इसलिए जो लोग इस दिन अपने घर को सब तरह से स्वच्छ, शुद्ध और सुशोभित करते हैं, दीपावली और दीप मालिका से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं और वहां स्थाई रूप से निवास करती हैं।
यह प्रदोष काल से आधी रात तक रहने वाली श्रेष्ठ अमावस्या होती है। सौभाग्य से इस वर्ष यह अमावस्या सूर्योदय से पूर्व शुरू होकर रातभर 3.47 बजे तक है। ज्योतिषी आचार्य डॉ. नवीन चंद्र जोशी और डॉ. गोपाल दत्त त्रिपाठी के मुताबिक आज के दिन प्रात:काल हनुमान जी के दर्शन, प्रदोष काल में लक्ष्मी, कुबेर और इंद्र का पूजन, सायंकाल घरों और देवालयों में दीपदान और रात्रि शेष में दरिद्र निवारण करना चाहिए।
महालक्ष्मी का पूजन स्थिर लग्न में किया जाता है। इस साल सायंकाल नैनीताल जिले में उत्तम और स्थिर वृषभ लग्न 06.25 से 9.00 बजे तक रहेगा। लक्ष्मी की विशेष पूजा के साथ श्रीसूक्त, कनक धारा स्तोत्र का पाठ, हवन, यंत्र अथवा मंत्र साधना आदि करने के लिए निशीथ काल में रात 11.55 से रात्रि 01.50 तक सिंह लग्न भी सर्वोत्तम रहेगा।
जिनके एक से अधिक प्रतिष्ठान हैं अथवा जिन्हें एक से अधिक स्थानों में सही मुहूर्त में पूजा करनी होती है वे लोग मध्याह्न 02.00 से 03.32 बजे के मध्य कुंभ लग्न में पूजन कर सकते हैं।
दीपावली पूजन में प्राय: प्रत्येक घर में लोग अपने रीति-रिवाज के अनुसार गणेश, लक्ष्मी और द्रव्य लक्ष्मी का पूजन करते हैं। कुछ लोग दीवार पर अथवा लकड़ी की चौकी पर खड़िया मिट्टी या रंगों द्वारा चित्र बनाकर या चौकी में गणेश, लक्ष्मी की मूर्ति रखकर अथवा चांदी आदि के सिक्के रखकर इनका पूजन करते हैं।
थाली में 13 या 26 दीपकों के मध्य तेल से प्रज्ज्वलित चौमुखा दीपक रखकर दीपमालिका पूजन भी किया जाता है और पूजा के बाद उन दीपों को घर के मुख्य-मुख्य स्थानों पर रख दिया जाता है। चौमुखा दीपक रातभर जलता रहे, ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए।
दीपावली पर कब क्या करें
सूर्योदय से पहले - स्नान
प्रात:काल - देवताओं का पूजन
दोपहर - पितरों का पूजन
दोपहर बाद - ब्राह्मणों को भोजन
सायंकाल प्रदोष काल में - दीपदान
प्रदोष काल स्थिर लग्न में - महालक्ष्मी पूजन
सायंकाल - मशाल दर्शन, दीपमाला प्रज्ज्वलन
रात्रि सिंह लग्न में - मंत्र सिद्धि
पूरे दिनभर - गोत्रि रात्र व्रत
दीपावली पूजन का मुहूर्त
गो धूलि लग्न- सायं 4.25 से 6.25 बजे तक
प्रदोष काल - सायं 5.40 से रात 9.15 बजे तक
सायंकाल वृष लग्न नैनीताल जनपद - 06.25 से 09.00 बजे तक
रात्रि सिंह लग्न - 12.00 से 01.30 बजे तक
मध्याह्न में मुहूर्त - 02.00 से 03.32 बजे तक
अमृत योग - सुबह 7.10-9.30 बजे तक