कुमाऊं मंडल की फारेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एफटीआई)की जमीन से झील दर्शन की योजना पर वन भूमि का पेच लग गया है। एफटीआई आरक्षित वन भूमि है, जहां से गैर वानिकी कार्य और व्यवसायिक कार्य के लिए अनुमति नहीं दी जा सकती है। हेलीकाप्टर उड़ान की शासन से केवल विशेषतौर पर दो दिन की अनुमति मिली थी, जो खत्म हो गई है। एफटीआई निदेशक के अनुसार अब उड़ान की अनुमति नहीं है।
केएमवीएन ने झील दर्शन योजना 19 दिसंबर से शुरू की है। यह सेवा एफटीआई मैदान से शुरू की गई है। इस सेवा के शुरू होने से पहले ही एफटीआई प्रबंधन ने आरक्षित वन भूमि (वन अधिनियम के तहत कोई भी गैर वानिकी कार्य और व्यवसायिक कार्य तभी हो सकता है, जब वन भूमि हस्तांतरित हो) होने के कारण अनुमति देने से मना कर दिया था।
मामला फंसता देख जिला प्रशासन और केएमवीएन ने शासन से संपर्क साधा। शासन से प्रमुख सचिव वन रामास्वामी ने योजना के शुभारंभ को देखते हुए दो दिन (19 और 20 दिसंबर) की अनुमति दी थी। जो अब खत्म हो गई है। ऐसे में फिलहाल अब आगे हेलीकाप्टर एफटीआई से उड़ेगा, उसको लेकर दुविधा बन गई है।
एफटीआई के प्रभारी निदेशक व मुख्य वन संरक्षक बीपी गुप्ता का कहना है कि नियमों को देखते हुए हमने अपने स्तर से उड़ान की अनुमति नहीं दी थी। शासन से केवल दो दिन की अनुमित दी गई थी, जो खत्म हो गई है। अब उड़ान संभव नहीं है।
पिछले दिनों केदारघाटी पर हेलीकाप्टर उड़ान को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्त रवैया अपनाया था। अब यह मामला भी वन, वन्यजीव विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार एफटीआई में आपातकालीन स्थितियों, वीआईपी मूवमेंट पर ही हेलीकाप्टर आदि उड़ान और उतरने की अनुमति प्रदान की जाती है।