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कुमाऊंनी होली एक विरासत: धर्म व मजहब से कहीं ऊपर है राग व रंगों की होली

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नैनीताल। इस वर्ष दशकों बाद होली और रमजान का पर्व एक साथ पड़ रहा है जिससे दोनों त्योहारों का उत्साह दोगुना हो गया है। युगमंच संस्था इस वर्ष अपनी स्वर्ण जयंती मना रही है। संस्था तीन दशकों से होली महोत्सव का आयोजन कर रही है।
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अध्यक्ष जहूर आलम के नेतृत्व में यह परंपरा आज भी जारी है। 90 के दशक में जनकवि गिरीश तिवारी गिर्दा, डॉ. विजय कृष्ण और विशंभर साह सखा जैसे लोगों ने होली पर बढ़ती फूहड़ता को रोकने के लिए इस महोत्सव की शुरुआत की थी। इसमें कई लोगों ने सहयोग किया। महोत्सव में खड़ी होली, पुरुष बैठ होली, महिला बैठ होली और स्वांग जैसी पारंपरिक शैलियों को शामिल किया जाता है। युगमंच के अध्यक्ष जहूर आलम ने कहा कि संगीत का स्थान हमेशा ही धर्म व मजहब से ऊंचा रहा है। सिने अभिनेता इदरीश मलिक का कहना है कि बचपन से ही होली जुलूस में भागीदारी की और गायकी की है। मंजूर हुसैन का कहना है कि मैंने युगमंच के साथ रहकर होली महोत्सव में सक्रिय भागीदारी निभाई है। सेंट जोसेफ के विद्यार्थी सैयद जामिन जाफरी का कहना है कि युगमंच की कार्यशाला से होली गायकी सीखने को मिली है। मंच में इसकी प्रस्तुति को लेकर उत्साहित हूं।
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