वित्तमंत्री डा. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि संस्कृति ही मानव की मूल पहचान है। कुमाऊं की मूल संस्कृति को संरक्षित करने के लिए सरकार पूर्ण मदद करेगी।
डा. हृदयेश रविवार को कुमाऊं लोक कलाकार महासंघ के प्रादेशिक वार्षिक अधिवेशन के उद्घाटन समारोह में बोल रही थी। समारोह जीजीआईसी सभागार में आयोजित था।
उन्होंने कहा कि लोक कलाकार अपना संपूर्ण जीवन कला संरक्षण के लिए लगा देते हैं। उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सूचना विभाग के माध्यम से दिए जाने वाले मानदेय में वृद्धि की जाएगी।
पर्वतीय संस्कृति की रक्षा के लिए जिन कलाकारों ने अपना पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया है, उनकी सूची तैयार कर आर्थिक मदद दी जाएगी।
डा. हृदयेश ने कहा कि सरकार ने अल्मोड़ा में आवासीय विश्वविद्यालय की घोषणा कर दी है। जिसमें फाइन आर्ट एवं कला संस्कृति, कुमायूं की लोक संस्कृति आदि विषय भी शामिल हैं।
जिसके माध्यम से कुमाऊं संस्कृति के बारे में युवा पीढ़ी को प्रोत्साहित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए शासन स्तर से 10 करोड़ की धनराशि भी स्वीकृति हो गई है। कुमायूं विश्वविद्यालय के कुलपति को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वित्तमंत्री ने कुमाऊं लोक कलाकार महासंघ की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को बधाई दी। कुमाऊं संस्कृति के विकास के लिए लोक कलाकार महासंघ को दो लाख की धनराशि विधायक निधि से देने की घोषणा की। कार्यक्रम में लोक कलाकारों ने कुमाऊंनी एवं गढ़वाली लोक गीतों एवं नृत्यों की प्रस्तुति दी।
इस दौरान महासंघ के अध्यक्ष शेखर जोशी, उपाध्यक्ष विनोद कुमार, महिला उपाध्यक्ष विमला बोरा, महासचिव गोपाल चमियाल, कोषाध्यक्ष राकेश कार्की, सचिव मोहन पांडे, गिरीश बर्गली, हेमराज बिष्ट, प्रकाश रावत, आनंद प्रसाद गड़िया, नीमा चंद्रा, राजेंद्र मेहता, चंद्रशेखर तिवारी, अजय चंदोला, नरेंद्र बिष्ट, रितेश जोशी, तारा राम, प्रहलाद मेहरा, विनोद कुमार, विपिन सनवाल, मयंक भट्ट, प्रमोद भट्ट, राहुल छिमवाल मौजूद थे।