कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर खान डेरा नामक स्थल यात्रियों को चकित करता है। इस मार्ग में इस तरह के नाम को लेकर यात्रियों की उत्सुकता बढ़ जाती है। कैलास मार्ग के बीच में एकाएक खान डेरे को लेकर यात्रियों की उत्सुकता बढ़ जाती है। वह इस स्थल के खान डेरा के नाम से प्रचलित होने के संबंध में कुमाऊं मंडल विकास निगम के कर्मचारियों से बारीकी से जानकारी लेते हैं।
कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग में गर्ब्यांग से पहले खान डेरा नाम पड़ने के पीछे बताया जाता है कि यहां पर एक बड़ी चट्टान थी। बताया गया है कि यह चट्टान इतनी कठोर है थी कि इसे आसानी से कोई तोड़ नहीं पाता था। कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक धीराज गर्ब्याल बताते हैं कि यहां कठोर चट्टान के होने की वजह से कैलास मानसरोवर को जाने में यहां से करीब एक महीने का समय लगता था।
कहा जाता है कि क्षेत्र में खान डेरा को लेकर कहा जाता है कि पचास के दशक में मैसूर के राजा यहां आए थे। तब इस चट्टान को तोड़े बगैर आगे बढ़ना मुश्किल था। जम्मू-कश्मीर के खान लोगों को ऐसी चट्टानों को तोड़ने में महारत हासिल थी। मैसूर के राजा ने इस कठोर चट्टान को तोड़ने के लिए जम्मू-कश्मीर से खान बुलाए। उन्होंने चट्टान को तोड़कर मार्ग बनाया। चट्टान तोड़ने आए खान इस जगह पर रात को रुका करते थे। तब से इसका नाम खान डेरा पड़ गया। केेेएमवीएम के एमडी गर्ब्याल कहते हैं कि यह चट्टान इतनी सख्त है कि अब भी ग्रिफ के जवान भी इसे नहीं तोड़ सकते हैं।