बीते एक दशक में भले ही ब्लाक के अधिकांश गांवों को सड़क से जोड़ दिया गया, लेकिन विडंबना है कि वर्तमान में भी क्षेत्र की समूची यातायात व्यवस्था केमू की दो बसों के अलावा जीपों पर ही निर्भर है।
उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में यात्रा करना इस विकास खंड के ग्रामीणों के लिए आज भी किसी सपने से कम नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां रोडवेज की एक भी बस नहीं चलती है। जिसके चलते यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं जीप संचालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूलकर उनकी जेब काटते रहते हैं।
दो दर्जन से अधिक ग्रामसभाओं के मध्य स्थित बेतालघाट की आबादी दस हजार के आसपास है। इसके बावजूद यहां यातायात के साधनों की कमी लोगों की परेशानी की मुख्य वजह है। बुजुर्गों की मानें तो परिवहन निगम ने इस क्षेत्र को कभी भी तवज्जो नहीं दी, यही कारण रहा कि आज तक यहां रोडवेज की एक भी बस संचालित नहीं हुई।
सायं चार बजे के बाद यदि किसी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना हो तो उसके पास टैक्सी बुक कराकर जाने के अलावा दूसरा और कोई माध्यम नहीं रहता। ऐसे में कई बार लोग देर सायं तक सड़कों पर भटकते देखे जा सकते हैं।
लोगों का कहना है कि अल्मोड़ा-बेतालघाट-रामनगर रोड को राज्य मार्ग घोषित कर इस पर रोडवेज की बसें संचालित की जानी चाहिए।
वर्तमान में अल्मोड़ा से रामनगर की दूरी 130 किलोमीटर है और यदि बेतालघाट में निर्माणाधीन रतौड़ा पुल और सेटी रोड का निर्माण पूरा हो जाए तो अल्मोड़ा से रामनगर की दूरी घटकर मात्र 100 किलोमीटर रह जाएगी। इस रोड पर यदि रोडवेज का संचालन हो तो यात्रियों को खास सुविधा मिलेगी।