हल्द्वानी। जम्मू- कश्मीर का अखरोट कुमाऊं के बागवानों की किस्मत बदलेगा। वन विभाग ने नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर, सिलालेख में कश्मीर के अखरोटों के जरिए सैकड़ों की संख्या में अखरोट की नई पौध तैयार करने का काम शुरू किया है। इन पौधों को बागवानों में बांटा जाएगा।
वन विभाग ने वन संसाधन प्रबंध परियोजना(जायका) के तहत काश्तकारों की आय में सुधार और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए अखरोट प्रजाति को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इसमें सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ टेम्परेट हार्टीकल्चर (सीआईटीएच) कश्मीर खास प्रजातियों(मदर प्लांट) को मुक्तेश्वर क्षेत्र के कुछ किसानों को उपलब्ध भी कराया गया है।
अब वन विभाग अखरोट की कश्मीर प्रजातियों को ग्राफ्ट विधि से भी मुक्तेश्वर के सिलालेख(1500) में तैयार करने में जुटा है। वनाधिकारियों के अनुसार मुक्तेश्वर में सीआईटीएच के सहयोग से भी करीब दो हजार तक पौधों को तैयार करने का काम चल रहा है।
पांच साल में आय हो जाएगी शुरू
वन क्षेत्राधिकारी मुक्तेश्वर रेंज लक्ष्मण सिंह मर्तोलिया के अनुसार पांच साल में तैयार वृक्ष से अखरोट को बिक्री किया जा सकेगा। एक वृक्ष से 25 से 30 किलो तक उत्पादन होने की संभावना है। मुक्तेश्वर जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्र के लिए यह प्रजाति मुफीद है।
नुकसान की आशंका कम
हल्द्वानी। वनाधिकारियों के अनुसार पहाड़ में कई बार रास्ता बंद होने से फल खराब हो जाते हैं, पर अखरोट के साथ यह समस्या नहीं आएगी। इसके अलावा बंदर आदि भी इसे कम नुकसान पहुंचने की संभावना है।
कोट - कई नर्सरियों में अखरोट के पौधों को तैयार किया जा रहा है। यहां से बागवान पौधे ले सकेंगे। साथ ही विभाग ने कश्मीर से लाए अखरोट के पौधों को भी स्थानीय लोगों को दिया है। इस योजना से लोगों की आजीविका में सुधार होगा। - डॉ तेजस्विनी पाटिल, दक्षिण वृत्त वन संरक्षक