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42 लोगों की दुनिया रोशन कर चुकी हैं कांता

Sun, 31 Jul 2016 11:47 PM IST
निशांत खनी, हल्द्वानी।
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कांता ‌व‌िनायक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कांता विनायक किसी परिचय की मोहताज नहीं है। कांता विनायक के प्रयासों से 42 दृष्टिहीन लोगों की दुनिया रोशन हो चुकी है। नेत्रदान के लिए कांता विनायक ने खुद के परिवार से शुरुआत की। उनके जुनून के चलते सैकड़ों लोग उनकी मुहिम का हिस्सा बन चुके हैं। रविवार को जेठ रवि कुमार विनायक (78) के आकस्मिक निधन होने पर कांता ने धार्मिक रीति रिवाजों को दरकिनार कर जेठ की आंखें मेडिकल कालेज में सुरक्षित करवाई। 
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कांता विनायक नेशनल एसोसिएशन फार ब्लाइंड (नैब) की उपाध्यक्ष हैं। गौलापार स्थित नैब संस्था दृष्टिहीन बच्चों के लिए काम करती है। संस्था की मदद से उत्तराखंड के दूर दराज गांवों के दर्जनों दृष्टिहीन बच्चे हल्द्वानी के निजी और सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। नैब के दृष्टिहीन बच्चों को देखकर ही कांता विनायक ने नेत्रदान के लिए लोगों को प्रेरित करने की मुहिम चलाई। शुरुआत खुद से और परिवार के सदस्यों से की। परिवार के सभी सदस्यों का नेत्रदान फार्म भरवाने के बाद हल्द्वानी एवं आसपास में नेत्रदान जागरूकता अभियान चलाया। उनकी इस मुहिम में सैकड़ों लोग जुड़ते गए।

कांता विनायक के प्रयासों से ही 21 लोगों के मरणोपरांत उनकी आंखें मेडिकल कालेज में सुरक्षित की गई। जिससे 42 दृष्टिहीन लोगों की दुनिया रोशन हो गई। कांता विनायक ने खुद अपने पति स्व. वीरेंद्र कुमार विनायक की आंखों को उनके मरणोपरांत दान कराया। पति वीरेंद्र कुमार का 10 जून 2016 को निधन हो गया था। रविवार को कांता विनायक ने अपने जेठ रवि कुमार विनायक की आंखों को भी मरणोपरांत प्रिजर्व कराया। रवि कुमार का रविवार सुबह तीन बजे निधन हो गया। कांता विनायक ने मेडिकल कालेज के नेत्ररोग के विभागाध्यक्ष डा. केएस तितियाल के सहयोग से जेठ के कार्निया को प्रिजर्व कराया। इस पुनीत कार्य में मेडिकल कालेज के डा. प्रवीण और डा. कल्पना ने अपना सहयोग दिया। 
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आई बैंक स्थापना के लिए चला रहे मुहिम
नैब के संस्थापक श्याम धनिक, डा. संतोष मिश्रा और डीएस नेगी भी कांता विनायक की मुहिम का हिस्सा हैं। ये सभी लोग हल्द्वानी में नेत्र बैंक की स्थापना के लिए शासन स्तर पर कई बार पत्राचार कर चुके हैं। लेकिन बजट की कमी से सुशीला तिवारी अस्पताल में आई बैंक अस्तित्व में नहीं आ सका है।
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