कालाढूंगी विधानसभा में कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय शर्मा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है। कालाढूंगी में वोटों का गणित उलझनेे लगा है। किसी के लिए भी राह आसान नहीं दिख रही है।
भाजपा को अपनों से मिलने वाली चुनौती का मुकाबला करना है तो कांग्रेस को वोटरों को अपने पाले में लाने के लिए जूझना होगा। हार के बाद भी पांच वर्षों तक क्षेत्र में लगातार जुटे रहे निर्दलीय शर्मा की राह भी काफी कठिन है।
2012 में भाजपा प्रत्याशी बंशीधर भगत को 22,744, कांग्रेस के प्रकाश जोशी को 20,374, निर्दलीय महेश शर्मा को 11,809, भूपेंद्र सिंह भाई जी को 8,925 और बसपा प्रत्याशी दीवान सिंह को 9,636 वोट मिले थे।
चुनाव में हारने के बाद भाईजी सीमित हो गए और विधानसभा की ओर रुख नहीं किया। जोशी यूपी के कांग्रेस सहप्रभारी भी हैं। इस नाते वह क्षेत्र में बहुत अधिक समय नहीं दे पाए। हालांकि 2012 में हार के बाद जोशी ने स्थानीय स्तर पर अपनी टीम खड़ी की।
दूसरी ओर भगत के लिए उन्हीं की पार्टी के एक नेता चुनौती बन सकते हैं। जबकि निर्दलीय प्रत्याशी महेश शर्मा ने हार के बाद कालाढूंगी विकास मंच बनाया। मंच के साथ लोगों को जोड़कर अपनी ताकत बढ़ाई।
शर्मा लगातार क्षेत्र से जुड़े रहे और समस्याओं को भी उठाते रहे। भगत ने भी उन क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया जहां से भाई जी को अधिक वोट मिले थे। कालाढूंगी में बदल रहे वोटों के गणित के कारण मुकाबला त्रिकोणीय और दिलचस्प होने की उम्मीद है।