नैनीताल। कैलाश मानसरोवर भारत के हिंदुओं सहित जैन, बौद्ध और अन्य धर्मावलंबियों के लिए भी बेहद पवित्र और आस्था का केंद्र है। उत्तराखंड से होकर चीन तिब्बत होते हुए यहां जाने वाली यात्रा के लिए भक्त अत्यंत उत्साहित रहते हैं लेकिन बीते कई वर्षों से कभी कोरोना कभी चीन से तनावपूर्ण संबंधों के चलते यह यात्रा आयोजित नहीं हो रही है। भारत सरकार इस संबंध में कोई वैकल्पिक मार्ग की तलाश में थी जिससे चीन जाए बगैर कैलाश के दर्शन हो सकें। अब इस संबंध में आंशिक सफलता मिलती नजर आ रही है हालांकि भारत से कैलाश दर्शन स्थल ओल्ड लिपुलेख पास के अत्यधिक ऊंचाई पर होने, वहां तक का मार्ग दुष्कर होने और वहां चलने वाली बेहद तेज हवा के अलावा कोहरा बड़ी चुनौतियां हैं। इस संबंध में शासन के निर्देश पर यात्रा कराने वाली मुख्य संस्था केएमवीएन सहित लोनिवि, सेना, आईटीबीपी, पर्यटन विभाग, बीआरओ आदि के वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्र की रेकी की। इसकी विस्तृत रिपोर्ट अब शासन को सौंपी जानी है।
कुमाऊं मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक एबी बाजपेयी ने बताया कि पिथौरागढ़ जिले में नाभीढांग से दस किमी आगे जाकर लगभग दो किलोमीटर के ट्रेक के बाद ओल्ड लिपुलेख पास से कैलाश पर्वत के बहुत साफ दर्शन हुए। इसके अलावा जौलिंकोंग से 13 किमी आगे तक गाड़ी से जाकर फिर ट्रेकिंग के बाद भी लिंपियाधुरा मांचियाधुरा से तो एक साथ कैलाश और आदि कैलाश के सुंदर दर्शन हुए। उन्होंने बताया कि यहां से मात्र 18 किमी की हवाई दूरी पर कैलाश के मनोरम दर्शन किए जा सकते हैं।
उन्होंने निगम के एमडी डाॅ. संदीप तिवारी के हवाले से बताया कि इन दोनों ही स्थानों की ऊंचाई लगभग 19000 फीट है जहां ऑक्सीजन की कमी है साथ ही आम तौर पर यहां चलने वाली बेहद तेज हवा यहां से दर्शन के मार्ग में बाधक हैं। बाजपेयी ने बताया कि नाभीढांग से 8 किमी के बाद और जौलिंगकोंग से 13 किमी के बाद जो पैदल ट्रेक है वह भी बर्फीला फिसलन वाला रास्ता है। इस सब के बाद भी ऊपर पहुंच कर यदि कोहरा हो तो दर्शन होना मुश्किल है लेकिन इस सब के बाद भी यहां से सुगमता से कैलाश दर्शन की पर्याप्त संभावनाएं हैं। संवाद
चीन से लगा संवेदनशील क्षेत्र है लिपु पास इलाका
नैनीताल। ओल्ड लिपु पास और लिंपियाधुरा क्षेत्र चीन सीमा से लगे होने के कारण अत्यंत संवेदनशील हैं। यहां तक यात्रा बगैर गृह मंत्रालय की स्वीकृति के प्रारंभ करना संभव नहीं है।
निगम के महाप्रबंधक बाजपेयी ने बताया कि इस संबंध में दो बार पर्यटन सचिव सचिन कुर्वे की उपस्थिति में केंद्रीय अधिकारियों उच्च स्तरीय बैठक हो चुकी है। अब रेकी टीम की रिपोर्ट पर राज्य और केंद्र सरकार निर्णय लेगी। यदि स्वीकृति मिली तो पासपोर्ट व वीजा के बगैर, बिना चीन गए ही श्रद्धालु उत्तराखंड से ही शिव धाम के दर्शन कर सकेंगे।