स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार ही संजीदगी नजर नहीं आ रही है। एसटीएच में हादसे-दर-हादसे होने के बावजूद कोई कठोर कार्रवाई अब तक नहीं की गई है। कुमाऊं का सबसे बड़ा अस्पताल जूनियर डाक्टरों के हवाले रहता है और आन काल भी डाक्टर नहीं आते हैं। एसटीएच के अलग-अलग विभागों में लगभग 67 डाक्टर कम हैं।
पिछले वर्ष सितंबर से हो रही घटनाओं में अधिकांश में डाक्टरों की लापरवाही उजागर हुई है। मरीजों ने आरोप लगाया कि बुलाने पर भी डाक्टर नहीं आए। सूर्यास्त के बाद तो अस्पताल में आने वाले मरीजों का भगवान ही मालिक होता है। पूरा अस्पताल जूनियर डाक्टरों के भरोसे रहता है। गंभीर मरीज आने के बाद भी डाक्टर आन काल नहीं आते हैं।
सूत्रों के अनुसार बायोकेमेस्ट्रिी में एक प्रोफेसर, फोरेंसिक मेडिसिन, त्वचा, बायोकेमेस्ट्रिी में एक-एक एसोसिएट प्रोफेसर, रेडियोलाजी में दो, एनस्थीसिया में दो, आर्थो में दो, जनरल मेडिसिन में दो, जनरल सर्जरी में एक, कम्यूनिटी मेडिसिन में एक असिस्टेंट प्रोफेसर कम है, जबकि 20 सीनियर रेजीडेंट और 33 जूनियर रेजीडेंट की भी कमी है।