दुर्गम जौलासाल के जंगल में बड़ी संख्या में संदिग्ध हथियार बंद लोग देख गये हैं। वन विभाग की सूचना पर पुलिस ने सर्च आपरेशन शुरू कर दिया है। आपरेशन में हल्द्वानी और तराई पूर्वी वन प्रभाग के आठ रेंज के वन कर्मी, चोरगलिया थाने की पुलिस के साथ हल्द्वानी से भी अतिरिक्त पुलिस बल को भी शामिल किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक मंगलवार की रात को एक गुज्जर ने 15-16 हथियारबंद लोगों को जौलासाल जंगल में देखा था, उसने बुधवार को हल्द्वानी वन प्रभाग की कलेगा चौकी को सूचना दी। इसके बाद चौकी पर तैनात कर्मियों ने जौलासाल रेंज के अधिकारियों को बताया। इसके बाद तत्काल वन विभाग की टीम ने संदिग्ध इलाके में अभियान शुरू किया।
गुज्जर ने हावभाव से नेपाली या पहाड़ी जैसे होने के साथ संदिग्धों के पास आधुनिक हथियार होने की बात बताई थी। इसके बाद वन विभाग की टीम ने पुलिस के आला अधिकारियों से संपर्क साधा।
वन विभाग और पुलिस कर्मियों ने आपरेशन चला दिया है। तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ नीतिशमणि त्रिपाठी कहते हैं कि हल्द्वानी वन प्रभाग में संदिग्ध देखे जाने की सूचना मिलने के साथ संयुक्त सर्च आपरेशन चलाया गया है।
मदद के लिए प्रभाग ने दो रेंजों के वन कर्मियों को भेजा है। आपरेशन रात से ही शुरू किया गया है। बृहस्पतिवार को और व्यापक अभियान चलेगा। आपरेशन को लेकर नेपाल सीमा के पास भी एलर्ट किया गया है।
अभियान में नंधौर, जौलासाल, छकाता, डाडा के अलावा तराई पूर्वी की दक्षिण जौलासाल, रनसाली रेंज की टीम शामिल है। सेनापानी और शारदा रेंज की टीम को भी एलर्ट किया गया है।
संदिग्ध जगहों की पहचान की गई
जंगल में कौन-कौन सी संदिग्ध जगह हैं, उसकी पहचान कर ली गई है। हर तरफ से इलाके को सर्च करने की योजना बनाई गई है। जिससे अगर कोई भी संदिग्ध है, तो वह बचकर न जा सके। इस इलाके में शिकारी, तस्करों का गैंग नानकमत्ता इलाके से होते हुए घुसपैठ करता रहता है, लेकिन इस बार उनकी आशंका कम ही बताई जा रही है।
2004 में आया था चर्चा में
जौलासाल का इलाका हसपुर खत्ता 2004 में माओवादी कैंप की सूचना के बाद से चर्चा में आया था। इसके बाद से पुलिस, वन विभाग की टीम इलाके पर खास तौर से नजर रखती है। जौलासाल से होते हुए एक पुराना और छोटा रास्ता टनकपुर तक जाता है, जिसके बाद नेपाल सीमा में प्रवेश करना आसान होता है।