सालों से जमरानी बांध बनने की प्रक्रिया चल रही है। मामला वन भूमि को लेकर लटका हुआ है। अगर सिंचाई और वन विभाग के विभागीय दावों को सही मानें तो अब उनके स्तर से भी औपचारिकता पूरी हो चुकी है। अब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से पहले चरण की अनुमति मिलने का इंतजार है।
जमरानी बांध का शिलान्यास 26 फरवरी 1976 को किया गया था। 61 करोड़ की योजना का लक्ष्य 1990 में बांध निर्माण को पूरा करना था। पर यह बांध आज तक पूरा नहीं हो सका है। बांध निर्माण में सबसे बड़ी अड़चन वन भूमि की है। करीब 155.88 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत है। सिंचाई विभाग के जमरानी खंड अधिकारियों के अनुसार महकमे की तरफ से सभी औपचारिकता पूरी की जा चुकी है। 2008 में इनवायरमेंट इंपेक्ट एस्समेंट हो चुका है। जितनी वन भूमि की जरूरत है, उससे दो गुनी भूमि (352 हेक्टेयर) का चयन पौड़ी जिले में हो चुका है। विभाग से जुड़ी अन्य सभी औपचारिकता पूरी हो चुकी है। अब पहले चरण की अनुमति मिलने का इंतजार है।
वहीं, नैनीताल वन प्रभाग की डीएफओ डा. तेजस्विनी पाटिल का कहना है कि कैचमेंट ट्रीटमेंट प्लान, वाइल्ड लाइफ ह्यूमन कंफलिक्ट मिटिगेशन प्लान (मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए) को तैयार कर फरवरी के अंतिम सप्ताह में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा जा चुका है। अब प्रभाग स्तर से कोई भी औपचारिकता शेष नहीं रह गई है। बांध परियोजना को केंद्रीय वन मंत्रालय से अनुमति मिलने का इंतजार है।
1883 से चल रहा भीमताल बांध
हल्द्वानी। भीमताल बांध उत्तराखंड का सबसे पुराना बांध है। जो 1883 से सेवा दे रहा है। साथ ही, धौरा 1960, नानक सागर 1962, बौर 1967 ,बैगुल डैम 1968, तुमड़िया डैम 1970, रामगंगा 1974 और हरिपुरा डैम 1975 में बनाया गया है। सिंचाई और बिजली के लिए बने यह डैम आज भी कारगर बने हुए हैं।