क्या आपने कभी किसी झील के पानी की सतह पर दौड़ लगाने, उछल कूद करने या फिर आराम से सोने की कल्पना की है। शायद नहीं, लेकिन अब आप अपनी इस कल्पना को न केवल साकार कर सकते हैं, बल्कि इसे महसूस भी कर सकते हैं। यह सब संभव होगा भीमताल झील में डाली गई जार्बिंग बाल से।
पिछले कुछ वर्षों तक भीमताल और इसके आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन के नाम पर सैलानियों के लिए घूमने-फिरने या फिर नौकायन के अलावा कुछ और विकल्प नहीं थे, लेकिन बीते एक दशक के भीतर भीमताल ने साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। कुछ साल पहले कुमाऊं मंडल विकास निगम ने पैराग्लाइडिंग की नींव रखी। हालांकि निगम ने बाद में इसे बंद कर दिया, लेकिन बाद में नौकुचियाताल निवासी यशवंत पोखरिया और पवन कुमार ने इसे अपने हाथ में ले लिया। आज यहां पैराग्लाइडिंग की कई साइटें चल रही हैं, जिसमें डेढ़ सौ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।
इसके बाद बिलासपुर (नौकुचियाताल) क्षेत्र के लाखन भगत एवं अन्य बेरोजगार युवाओं ने भीमताल झील में कयाकिंग शुरू की। इसे भी सैलानियों ने हाथों हाथ लिया। रविवार को जून स्टेट निवासी जितेंद्र बिष्ट एवं कुछ अन्य युवाओं ने भीमताल झील में दो जार्बिंग बाल डाली, जिन्हें देखने के लिए सैलानियों की भीड़ जुट गई। अलग-अलग साइज की इन बाल में एक बार में एक सैलानी को बैठाकर पंप से हवा भरी जाती है और उसके बाद बाल को बंद (एयर टाइट) कर झील में छोड़ दिया जाता है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक कोई भी जार्बिंग बाल में बैठकर पानी में चलने, दौड़ने से लेकर उछलकूद तक कर सकता है, लेकिन यह सब मुफ्त में नहीं होता। 300 रुपए चार्ज पड़ेगा और करीब 2-3 मिनट तक जार्बिंग बाल में डाला जाएगा। इससे भीमताल साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में एक कदम और आगे बढ़ा है।