हल्द्वानी। पांच साल में जमरानी बांध परियोजना की लागत 1208 करोड़ बढ़ गई है। 2018 में निर्धारित दरों के हिसाब से परियोजना की लागत 2584.1 करोड़ रुपये थी। वर्तमान में इसकी लागत 3756.44 करोड़ रुपये पहुंच गई है। जमरानी परियोजना इकाई संसोधित लागत का प्रस्ताव भारत सरकार को भेज रही है।
उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश की सिंचाई और पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए जमरानी बांध परियोजना का निर्माण किया जा रहा है। सिंचाई संबंधित कार्यों के लिए केंद्र सरकार से 90 प्रतिशत केंद्रांश के तहत 1730.20 करोड़ की स्वीकृति मिली है। शेष राशि यूपी और राज्य सरकार खर्च को खर्च करनी है। वर्तमान दरों के हिसाब से परियोजना की लागत बढ़ने पर राज्य सरकार पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। ये हाल तब है जब जमरानी बांध परियोजना की लागत में जमरानी पेयजल योजना और विद्युत उत्पादन में खर्च होने वाली धनराशि शामिल नहीं है। हल्द्वानी को 117 एमएलडी (मिलियन लीटर डे) पानी उपलब्ध कराने वाली जमरानी पेयजल योजना की संसोधित लागत भी 704 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है। इसका जिम्मा पेयजल निगम के पास है। वहीं विद्युत उत्पादन का जिम्मा उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) के पास है। जमरानी बांध से 63.4 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन करने में भी 120 करोड़ रुपये लागत आएगी।
एक हफ्ते में पुनर्वास स्थल की जमीन भी मिल जाएगी
जमरानी बांध परियोजना से छह गांवों के 1261 परिवार प्रभावित हो रहे हैं। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए ऊधमसिंहनगर जिले के प्राग फार्म में 300.5 एकड़ भूमि प्रस्तावित है। बताते हैं कि एक हफ्ते के भीतर जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। पुनर्वास स्थल पर मास्टर प्लान बनाने के लिए टाउन प्लानिंग विभाग से भी वार्ता हो गई है।
जमरानी बांध परियोजना की प्रस्तावित लागत 2018 की दरों के हिसाब से भेजी गई थीं। वर्तमान में निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने से परियोजना की लागत बढ़ गई है। परियोजना के अधिकारियों को संसोधित प्रस्ताव भेजने के कहा है। टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
- दीपक रावत, कुमाऊं कमिश्नर
जमरानी बांध परियोजना की लागत वर्ष 2018 में 2548.1 करोड़ थी जो वर्तमान में लगभग 3756.44 करोड़ हो चुकी है। संसोधित लागत से संबंधित पत्र भारत सरकार को भेज रहे हैं। प्रोजेक्ट को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
-प्रशांत बिश्नोई, जीएम, जमरानी परियोजना