प्रशासन विकास के लिए कितना संजीदा है, इसका अंदाजा प्रशासन की कार्यप्रणाली से आंका जा सकता है। 10 दिन बीतने के बाद एसडीएम ने आईएसबीटी से जुड़ी कब्र के मामले की रिपोर्ट डीएम को भेजी है। वहीं पुलिस ने प्रस्तावित आईएसबीटी में मिले कंकाल को सीज करा है। अभी कार्बन डेटिंग कराने को लेकर शासन को कोई पत्र भी नहीं भेजा गया है।
आईएसबीटी की जमीन पर कब्र मिलने के मामले के तूल पकड़ने के बाद भी जिला प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। जबकि शहर की जनता जल्द आईएसबीटी बनाने की मांग कर रही है। प्रशासन इस मामले में कितना लापरवाह बना है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन ने 10 दिन बीतने के बाद इसकी रिपोर्ट डीएम को भेजी है।
एसडीएम एपी वाजपेई ने जो शासन को रिपोर्ट भेजी है, उसमें आईएसबीटी की निर्माणदायी संस्था नागार्जुन का हवाला दिया गया है। साथ ही कहा गया है कि मिले गए कंकाल में किसी ने दावा नहीं किया है।
यह कंकाल खुदाई में नहीं पाया गया था।
कार्यदायी संस्था नागार्जुन ने रिपोर्ट देने में देर की थी। इसी कारण रिपोर्ट भेजने में देर हो गई। शुक्रवार को रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है। कार्बन डेटिंग का निर्णय शासन को लेना होता है। अभी तक कंकाल में किसी ने दावा नहीं किया है।
- एपी वाजपेयी, एसडीएम।
नागार्जुन कंपनी ने दी रिपोर्ट कहा - हमारे क्षेत्र में कुछ पत्थरनुमा ढांचे
नागार्जुन कंपनी ने जो रिपोर्ट एसडीएम को भेजी है, उसमें कहा गया है कि कंपनी को प्रस्तावित आईएसबीटी की खुदाई में कोई कंकाल नहीं मिला है। एक कंकाल जो मिला है, वह बहारी क्षेत्र में है। कंपनी ने कहा है कि वहां पत्थरनुमा ढांचे हैं, जिसमें से कुछ क्षेत्र ही उनकी बाउंड्री में आ रहा है, शेष क्षेत्र उनकी सीमा में नहीं आता।
अधिकारी बोले - यहां दफनाए जाते थे लावारिस और बच्चों के शव
तराई पूर्वी वन प्रभाग के गौला रेंज में 2002 से 2007 तक वन क्षेत्राधिकारी रहे डीएस मर्तोलिया और वर्तमान में एसडीओ तराई पूर्वी वन प्रभाग का कहना है कि इस क्षेत्र में आकस्मिक मरे छोटे बच्चे और लावारिस लाशों को दफनाया जाता था। उनका कहना है कि उनके कार्यकाल के दौरान (2002 से 2007 के बीच) गश्त के दौरान उन्होंने कई ग्रामीणों को इस क्षेत्र से शव दफनाने के दौरान खदेड़ा था।