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बिना द्रोण एकलव्य बनाने की जिद

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हल्द्वानी। गौलापार किशनपुर में राजकीय महाविद्यालय हल्द्वानी (शहर) खुलते ही विद्यार्थियों की अच्छी खासी संख्या हो गई है। यहां कला, विज्ञान और वाणिज्य तीनों संकायों की मंजूरी मिलने से पहले साल में ही छात्रसंख्या के उत्साहजनक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। मगर अब इन विद्यार्थियों के लिए अब सुचारु पठन-पाठन की समस्या उत्पन्न हो सकती है। पर्याप्त स्टाफ, भवन नहीं होने से पहले साल से ही विद्यार्थियों को दिक्कतें पैदा हो सकती हैं हालांकि महाविद्यालय के प्राचार्य सुचारु पठन-पाठन किए जाने को लेकर आश्वस्त हैं। महाविद्यालय में अभी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की संख्या भी न्यून है।
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हल्द्वानी शहर के लिए इसी वर्ष नए महाविद्यालय की स्थापना की गई है। महाविद्यालय के लिए कई दिनों तक भूमि और भवन की तलाश की गई लेकिन पर्याप्त कक्षों युक्त भवन और भूमि का प्रबंध नहीं हो सका। बाद में किशनपुर गौलापार में एक निजी भवन में महाविद्यालय खोला गया। इस भवन में वैसे तो चार कक्ष हैं लेकिन कक्ष इतने छोटे हैं कि इनमें बमुश्किल 10 से 15 विद्यार्थी ही बैठ सकते हैं। दरअसल जिस भवन में महाविद्यालय खोला गया है, इस भवन में पूर्व में एक निजी स्कूल की नर्सरी कक्षाओं का संचालन होता था। महाविद्यालय में विज्ञान संकाय के वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान और भौतिक विज्ञान के प्राध्यपाकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। हालांकि रसायन विज्ञान के प्राध्यापक की नियुक्ति नहीं हुई मगर प्राचार्य के रसायन विज्ञान के होने से इस विषय का शिक्षण किया जा सकता है। इस संबंध में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार का कहना है कि महाविद्यालय में ऑफलाइन के अलावा ऑनलाइन शिक्षण का विकल्प भी रखा गया है। विज्ञान संकाय के प्राध्यापकों के अलावा चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों की संभवतया जल्द नियुक्ति होनी है। चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों की नियुक्ति उपनल के माध्यम से किए जाने की संभावना है। फिलहाल उपलब्ध स्टाफ और संसाधनों से शिक्षण कार्य किया जाएगा।
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