प्राइमरी स्कूल इंद्रानगर के बच्चों को इस वर्ष भी नये सत्र में अपना विद्यालय भवन नसीब नहीं हो सकेगा। शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल भवन निर्माण के लिए शासन को भेजे प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी है। इस वजह से बच्चों को इस सत्र में भी बनभूलपुरा इंटर कालेज के एक हॉल में ही बैठकर पढ़ना होगा।
गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए न शासन गंभीर है और न ही शिक्षा विभाग। इंदिरानगर प्राइमरी स्कूल के करीब साढ़े 400 बच्चों की पढ़ाई की बेहतर व्यवस्था डेढ़ साल बीतने के बाद भी नहीं हो सकी है। इंदिरानगर प्राइमरी स्कूल को पिछले वर्ष लोनिवि द्वारा जर्जर घोषित कर दिया गया था। इसके बावजूद स्कूल को शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने पड़ोस के बनभूलपुरा जीआईसी में शिफ्ट करवा दिया था, लेकिन वहां स्कूल की कक्षाएं अलग-अलग लगने के लिए कमरे न होने के कारण इंटर कालेज के हॉल में ही लगाई जाती है।
विभाग की लापरवाही का खामियाजा प्राइमरी स्कूल के साढ़े 400 बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। गरीब बच्चों को इंटर कालेज के टूटे हाल में बैठा कर कक्षा एक से लेकर पांच तक की कक्षाएं संचालित की जाती हैं। बच्चों को उम्मीद थी कि नये शिक्षा सत्र से उन्हें अपना स्कूल भवन मिल जाएगा मगर ऐसा नहीं हो सका। पहली जुलाई से स्कूल खुल जाएंगे तथा प्राइमरी के बच्चों को फिर से वही अव्यवस्थाओं के बीच पढ़ने को मजबूर होना पड़ेगा। इंटर कालेज के हॉल में एक साथ पांच कक्षाएं लगने पर बच्चों की क्या पढ़ाई होती होगी, इसका अंदाजा स्वयं लगाया जा सकता है।
विभाग के अधिकारियों ने स्कूल शिफ्ट करने के समय दावा किया था प्राइमरी स्कूल के जर्जर भवन के निर्माण के लिए बजट स्वीकृत हो गया है तथा जल्द निर्माण शुरू हो जाएगा पर सर्वशिक्षा अभियान से इसकी मंजूरी ही नहीं हो सकी है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने को लेकर स्कूल की शिक्षिकाएं भी परेशान हैं।
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सर्वशिक्षा अभियान से प्राइमरी स्कूल के भवन निर्माण के लिए प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजा गया था। यह प्रोजेक्ट करीब दस लाख रुपये का था। लेकिन सर्वशिक्षा अभियान के तहत विभाग को निर्माण मद में केंद्र से कोई बजट न मिलने की वजह से स्कूल भवन निर्माण के प्रोजेक्ट को भी स्वीकृति नहीं मिल सकी है। स्कूल भवन न होने से बच्चों को हो रही परेशानी को देखते हुए मुख्यालय को फिर लिखा गया है।
- हरेंद्र मिश्रा, खंड शिक्षा अधिकारी, हल्द्वानी