नैनीताल के डीएसबी परिसर में 17वें दीक्षांत समारोह में संबोधित करते ले.ज. गुरमीत सिंह।
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नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने अपने जोशीले भाषण से एक अलग ही माहौल बना दिया। उन्होंने युवाओं से देश की सेवा में अपनी जान तक कुर्बान कर देने का आह्वान करते हुए कहा कि कोरोना काल में देश ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत कैसे बड़ी से बड़ी समस्या का सामना करते हुए आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कदम-कदम पर दैवीय शक्ति, चमत्कार और प्रभु का साक्षात अहसास होता है। ज्यादातर स्वर्ण पदक छात्राओं के जीतने पर उन्होंने इसे भी मातृशक्ति और नारी शक्ति पर दैवीय आशीर्वाद बताया। राज्यपाल ने अनेक बार अपने चुटीले वक्तव्यों से लोगों को हंसने पर भी मजबूर किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट उपलब्धि के साथ भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है। लोग उनकी बात गौर से सुन ही रहे थे तो वो बोले इस बात पर ताली नहीं बजाओगे? फिर उन्होंने पूछा कि वे बहुत जोर से तो नहीं बोल रहे, लोगों के इस पर ना कहने पर वे बोले कि उनकी पत्नी जाने क्यों उनसे कहती रहती हैं कि इतनी जोर से क्यों बोलते हो। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा देव वाणी है और सर्वोच्च ज्ञान इसी भाषा में अभिव्यक्त किया गया है। उन्होंने जय हिंद का नारा लगवाकर अपना उद्बोधन पूरा किया। समाप्ति पर उन्होंने कहा कि मैंने भी कहीं पढ़ रखा है कि अब मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं। संवाद