हल्द्वानी। हृदय वॉल्व से संबंधित बीमारी बढ़ते जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय के वॉल्व ठीक से काम नहीं करते हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल मेें उपचार के लिए ओपीडी में 10-15 ऐसे मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं।
एसटीएच के जूनियर रेजिडेंट डॉ. रोहन ने बताया कि जब हृदय में महाधमनी, माइट्रल, फुफ्फुसीय या त्रिकपर्दी में से दो या दो से अधिक वॉल्व ठीक से काम नहीं करते हैं। इससे वॉल्व में सिकुड़न और लीकेज होने लगती है। इससे शरीर में रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। रोजाना की 60 से 70 की ओपीडी में 10-15 मरीज हृदय वॉल्व की शिकायत लेकर पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि हृदय वाॅल्व रोग धीरे-धीरे विकसित होता है। बहुत से लोगों में आनुवांशिक रूप से होता है। इलाज न करने पर यह गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।
हृदय के वॉल्व छोटे दरवाजों की तरह काम करते हैं जो हर धड़कन के साथ खुलते और बंद होते हैं। इससे रक्त का प्रवाह सही दिशा में बहता रहता है। -डॉ. अरुण जोशी कार्डियोलॉजिस्ट, एसटीएच