मानसून कभी भी दस्तक दे सकता है मगर हमारे अस्पताल की तैयारी अधूरी है। डायरिया से निपटने को पर्याप्त मात्रा में आरएल की ड्रिप नहीं है। तो लोहा लगने के बाद टिटनेस से बचाने को लगने वाला टीटी का इंजेक्शन भी मुख्यालय ने नहीं भेजा है।
मौसम का मिजाज बदल रहा है और मानसून कभी भी दस्तक दे सकता है। मानसून के बाद ही डेंगू का प्रकोप शुरू होता है। बेस अस्पताल में सबसे अधिक मरीज आते हैं। प्रतिदिन लगभग 12 सौ से 14 सौ मरीज ओपीडी में होते हैं।
ऐसे में अस्पताल में अभी तक डेंगू मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड नहीं बनाया गया है। बारिश में ही सांप काटने के मामले सबसे अधिक आते हैं। सूत्रों की मानें तो बेस अस्पताल के स्टॉक में मात्र 64 वायल एंटी वैनम की हैं, जबकि एंटी रैबीज के सिर्फ 90 इंजेक्शन हैं।
खास बात ये है कि डायरिया के मरीज भी अस्पताल में प्रतिदिन पहुंच रहे हैं बावजूद इसके स्वास्थ्य महानिदेशालय से अभी तक आरएल ड्रिप नहीं भेजी गई है। महानिदेशालय से रैबीज के इंजेक्शन भी नहीं आए हैं।
बारिश में वाहन फिसलने के कारण लोग गिरकर चोटिल होते हैं। कई बार लोगों को लोहा लग जाता है। लोहा लगने या जमीन की रगड़ खाने पर डॉक्टर सुरक्षा के लिहाज से टीटी लगाते हैं। बेस अस्पताल में टीटी के इंजेक्शन भी नहीं हैं।
नेत्र रोग वार्ड को आइसोलेशन वार्ड बनाया जाएगा। नेत्र रोग वार्ड में आठ बेड हैं। फैक्टर 7,8,9, ओआरएस एवं मेट्रोजिल की गोलियां भी आ गई हैं। जल्द ही सभी व्यवस्थाएं चाकचौबंद कर ली जाएंगी।
- डॉ. एसबी ओली सीएमएस, बेस अस्पताल हल्द्वानी।