हाईकोर्ट ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में विधायक सहित 42 अन्य की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। विधायक पूरन फर्त्याल व अन्य ने हाईकोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया था।
मामले के अनुसार पिछले साल जुलाई में जिला चंपावत सदस्य मीना देवी का अपहरण हुआ था, जिसे बरामद करने के लिए धरना प्रदर्शन किया गया था।
विधायक पूरन फर्त्याल को वार्ता के लिए बुलाया गया था, तभी 250 अज्ञात कार्यकर्ताओं ने डीएम कार्यालय में तोड-फोड की। उसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा दिया।
इस मामले में 1 अगस्त 2014 को एसएचओ ने एफआईआर दर्ज कराई। जांच के बाद विधायक व अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई।
इस आरोप पत्र के खिलाफ विधायक सहित अन्य ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। कोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ताओं को निचली अदालत में सरेंडर करने के निर्देश दिए तथा उसी दिन जमानत याचिका पर सुनवाई के आदेश भी दिए।
हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में याचिककर्ताओं ने 3 अगस्त 2015 को सेरेंडर किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चंपावत ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
5 अगस्त 2015 को मामले की सुनवाई जिला जज की अदालत में हुई। कोर्ट ने विधायक सहित अन्य का जाम लगाने के मामले में जमानत दे दी लेकिन डीएम कार्यालय में तोडफोड करने के आरोप में जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।
विधायक सहित 42 अन्य ने हाईकोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दायर किया था। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सभी की जमानत प्रार्थना पत्र को स्वीकर कर लिया।