केवल नदियों में बड़े स्तर पर खनन नहीं होता है बल्कि निजी पट्टों के जरिये भी बड़ी मात्रा में खनिज निकाला जाता है। यह निजी पट्टे भी करीब तीन सालों में रेवड़ी की तरह बांटे गए।
खान विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक करीब तीन साल पहले तक नैनीताल जिले में केवल खनन पट्टा था। बाद में जब खनन का काम तेज हुआ तो कई ‘खिलाड़ी’ मैदान में आ गए। इस समय नैनीताल जिले में ही अमृतपुर, जमरानी जगहों पर केएमवीएन के दो पट्टे और 23 निजी पट्टे से खनन किया जा रहा है।
इन पट्टों में गड़बड़ियों को लेकर छापेमारी, जुर्माना का सिलसिला चलता ही रहता है। इसी तरह ऊधम सिंह नगर जिले में 70 पट्टे निजी और पांच केएमवीएन के पट्टे से खनन हो रहा है। ऊधमसिंह नगर जिले में पहले करीब 20 पट्टे थे। ऊधमसिंह नगर की बात करें तो शांतिपुरी का इलाका अवैध खनन के लिए बदनाम रहा है। इस तरह दोनों जिलों में कैलास, गौला और कोसी में करीब 100 पट्टे हैं। इसमें से अधिकांश पट्टे बीते तीन सालों में दिए गए हैं। करीब 30 लाख घनमीटर खनिज की निकासी होती है।
जुर्माना तो खूब पर मिलती ‘रेजगारी’
हल्द्वानी। अवैध खनन पकड़े जाने पर हजारों घनमीटर खनिज को सीज करने में लाखों से करोड़ों तक के जुर्माने लगाए जाते हैं। अफसरों की खूब फोटोग्राफी होती है। पर वास्तविक तौर पर जुर्माना मिलता कितना है, इसको देखने की फुर्सत अधिकारियों के पास नहीं है। खनिज विभाग के ही आंकड़ों के अनुसार 2014-15 में 40 पट्टा धारक पर अवैध खनन, भंडारण आदि पर करीब दो करोड़ 41 लाख का जुर्माना किया।
इसके बदले 12 लोगों ने विभाग को 25 लाख 36 हजार ही जमा किए। 2015-16 में 32 लोगों को इन्हीं अपराध में पकड़ा गया। इस बार तो जमा करने वालों की रफ्तार और कम हो गई। केवल तीन लाख 54 हजार ही जुर्माना जमा हो पाया। अभी भी करीब 15 करोड़ का जुर्माना जमा होना बाकी है। अधिकारियों के अनुसार इसमें से कई मामले अलग-अलग स्तर (जुर्माने पर संतुष्ट नहीं होने पर उच्च स्तर पर अपील किया जा सकता है) पर विचाराधीन हो सकते हैं। उप निदेशक राजपाल लेघा का कहना है कि अभी वित्तीय वर्ष खत्म हुआ है। इसमें कितने लोगों ने जुर्माना जमा किया है, उसकी सूचना आनी बाकी है। अभी स्थिति नहीं बताई जा सकती है।