इस साल तीन महीने में बंदर, लंगूर और आवारा कुत्ते 376 लोगों को काट चुके हैं, जबकि इससे पूर्व तीन साल में बंदर, लंगूर और आवारा कुत्ते 3829 लोगों को काट चुके हैं। अब यह संख्या बढ़कर 4205 हो गई है। अब हाईकोर्ट की ओर से आए आदेश से उम्मीद जगी है कि पालिका प्रशासन हरकत में आएगा और नगर में घूम रहे आवारा कुत्तों, बंदरों, लंगूरों से निजात मिलेगी।
नगर में आवारा कुत्तों, बंदरों, लंगूरों के काटे जाने की घटनाएं आए दिन होती रहती हैं। पालिका प्रशासन ने कुत्तों के बधियाकरण के लिए पाइंस में दो आपरेशन थियेटर तैयार कराए। लाखों रुपए इसमें खर्च किए गए। पंतनगर से डाक्टरों की टीम भी बुला ली गई, लेकिन एकाएक बधियाकरण का काम बंद कर दिया गया। तर्क दिया गया कि पशु प्रेमियों के हस्तक्षेप के कारण बधियाकरण कार्य बंद करना पड़ा। तब से अब बाजार में आवारा कुत्ते, बंदर और लंगूर बेखौफ होकर घूम रहे हैं। अब चूंकि पर्यटन सीजन सिर पर है। आवारा कुत्तों, बंदरों के काटने से पर्यटक सीजन पर वितरित असर पड़ सकता है, लेकिन पालिका प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।