बकरीद शनिवार को अकीदत और उत्साह के साथ मनाई गई। मूसलाधार बारिश के बीच मस्जिदों में लोगों ने नमाज अदा की। एक-दूसरे को गले लगकर मुबारकबाद दी। उसके बाद शुरू हुआ कुर्बानी का सिलसिला, जो लगातार तीन दिन चलेगा।
शनिवार सुबह से ही लोग ईद की तैयारियों में जुट गए। हल्द्वानी में मंगल पड़ाव स्थित ईदगाह में विशेष इंतजाम किए गए थे लेकिन बारिश की वजह से जामा मस्जिद में नमाज अदा की गई।
नमाज से पहले लोगों को खिताब करते हुए पेश इमाम मुफ्ती शाहिद अजहरी ने कहा कि कुर्बानी केवल रस्म अदायगी नहीं, बल्कि अल्लाह की राह में और गरीबों, यतीमों, परेशान हाल लोगों की मदद में खुद को पेश करने का नाम है।
कुर्बानी करना इस बात की दलील है कि लोग अपनी सबसे कीमती चीज परवरदिगार की रजा के लिए कुर्बान कर रहे हैं, जैसा कि हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने किया। मस्जिद बंजारान में पेश इमाम मौलाना अब्दुल बासित ने नमाज पढ़ाई।
उन्होंने लोगों को कुर्बानी का तरीका बताया। नमाज के बाद मुल्क में अमन, खुशहाली की दुआ की गई। इस दौरान अन्य मस्जिदों में नमाज अदा की गई। सभी मस्जिदों में भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने मस्जिदों की छतों पर भीगते हुए भी नमाज अदा की।
मस्जिद बिलाली में मौलाना मोहम्मद आसिम, मस्जिद सुनहरी में मुफ्ती निजामुद्दीन, मस्जिद कुरैशियान में मौलाना कमर अशरफ, चिराग शाह बाबा मस्जिद में मौलाना हयातुल्ला खान, लाल मस्जिद में मौलाना अब्दुल रऊफ, ताज मस्जिद में मौलाना फुरकान कासमी, मस्जिद उमर में मौलाना मुकीम कासमी, इंदिरा नगर बड़ी मस्जिद में मौलाना सैयद इरफान रसूल, नमरा मस्जिद में मौलाना मोहम्मद अकरम, रजा मस्जिद में मौलाना शाहिद रजा, नूरी मस्जिद में मौलाना शाहिद रजा मिस्बाही, बिलाले मुस्तफा में अहमद अली नूरी ने नमाज पढ़ाई।
जामा मस्जिद में दो बार नमाज पढ़ी गई
शनिवार को सुबह से ही मूसलाधार बारिश हुई। ईदगाह में नौ बजे नमाज होनी थी लेकिन बारिश के कारण ईदगाह कमेटी ने आनन फानन में नमाज जामा मस्जिद में कराने का फैसला किया।
नमाजियों की भीड़ को देखते हुए जामा मस्जिद में ईद की नमाज दो शिफ्टों में पढ़ी गई। सुबह नौ बजे पेश इमाम मुफ्ती शाहिद अजहरी ने और 10 बजे हाफिज सलीम ने नमाज पढ़ाई।
तीन दिन चलेगा कुर्बानी का सिलसिला
उलमा का कहना है कि अरबी कैलेंडर के माह जिलहिज्जा की 10, 11 और 12 तारीख कुर्बानी के लिए खास हैं। रविवार और सोमवार को भी कुर्बानी की जाएगी। सोमवार को सूरज डूबने से पहले तक कुर्बानी की जा सकती है। इन दिनों कुर्बानी सबसे बड़ा अमल माना जाता है।
खाल की रकम से की गरीबों की मदद
कुर्बानी के गोश्त के तीन हिस्से किए गए। एक गरीबों को दिया गया, दूसरा जरूरतमंद रिश्तेदारों में बांटा गया और तीसरा हिस्सा अपने इस्तेमाल के लिए रखा। इसके साथ ही कुर्बानी के जानवर की खाल की रकम जरूरतमंदों को दान की गई।
मेले जैसा माहौल
लाइन नंबर 17 में मेले जैसा माहौल रहा। बच्चों के लिए खिलौने की दुकानों के साथ झूले भी लगे रहे। नमाज पढने के बाद बच्चों ने खिलौने आदि खरीदे।