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Haldwani News: अमर उजाला संवाद में डंपर स्वामियों ने बयां किया दर्द, बोले-सरकार को करनी चाहिए जांच

Fri, 30 Jan 2026 10:33 AM IST
गायत्री जोशी संवाद न्यूज एजेंसी

सार

हल्द्वानी में दिनदहाड़े डंपर व टिप्परों से हो रहे हादसों और ओवरलोडिंग पर सड़क सुरक्षा माह के तहत अमर उजाला संवाद में वाहन स्वामियों ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर  सवाल उठाए।
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अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मौजूद आरटीओ अरविंद पांडे व डंपर स्वामी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हल्द्वानी शहर की गलियों और मोहल्लों में दिनदहाड़े भारी माल लेकर दौड़ रहे डंपर व टिप्परों के कारण आए दिन हादसों की खबर मिलती रहती है। सड़क सुरक्षा माह के तहत बृहस्पतिवार को आयोजित अमर उजाला संवाद में डंपर स्वामियों से इस बारे में चर्चा की गई की गई तो उन्होंने आरटीओ प्रवर्तन की मौजूदगी में कहा कि चौराहों पर पुलिस की लूट से ही ट्रक, डंपर व टिप्पर मालिकों को नियम रौंदने की छूट मिल रही है।

अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में वाहन स्वामियों ने कहा कि जब मुख्यमंत्री आते हैं तो 10 किमी के दायरे में सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। हर चौराहे में पुलिस तैनात रहती है। अन्य दिनों इन्हीं चौराहों पर पुलिस की शह मिलने के बाद ही बड़े वाहन अंदर जा सकते हैं। इन्हीं चौराहों पर पैसों के जरिये सारा खेल होता है।

डंपर स्वामियों ने स्पष्ट किया कि 80 फीसदी डंपर तो गौला नदी में चलते हैं और सारा माल क्रशरों में डलता है। उनका कहना था कि डंपर स्वामी या चालक नहीं चाहते किसी के घर का चिराग बुझे। इसमें प्रशासन और पुलिस को ओवरलोडिंग और गलियों में आने वालों पर भारी भरकम जुर्माना लगाना चाहिए। संवाद में अब्दुल माजिद, अब्दुल वाजिद, भूपेंद्र सिंह, कौस्तुभ भट्ट, संजय वोहरा, वीरेंद्र सिंह नेगी, भुवन चंद्र जोशी, नवीन चंद्र आदि कई डंपर स्वामी मौजूद रहे।

दुर्घटना तेजी से आ रहे ट्रक या टिप्परों से होती है लेकिन बदनाम डंपर वाले होते हैं। हमारे अधिकतर वाहन शहर में आते ही नहीं हैं। शहर में अगर कुछ आते भी हैं तो सारा खेल पुलिस की शह पर ही होता है। अगर नो एंट्री जोन में वाहन जा रहे हैं तो प्रशासन की लापरवाही है। नियम विरुद्ध काम करने वालों पर कार्रवाई हो, जुर्माना लगाया जाए। हम पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। - मनोज मठपाल, अध्यक्ष डंपर एसोसिएशन

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खनन विभाग के नियम हैं कि भार क्षमता से अधिक ले जाने पर रायल्टी नहीं मिलेगी लेकिन वन निगम लापरवाही बरत रहा है। छह हजार डंपर तो गौला नदी में ही काम करते हैं जबकि टिप्पर शहर में बेखौफ होकर ओवरलोड में चल रहे हैं। यही दुर्घटना का कारण बनते हैं। वन विभाग के अधिकारी क्रशर लॉबी के दबाव में काम करते हैं। प्रशासन माल लाने के लिए कहता है लेकिन रेट पर लगाम नहीं लगाता जिसका फायदा क्रशर वाले उठाते हैं। - पृथ्वीराज पाठक, महामंत्री, डंपर एसोसिएशन।

ओवरलोडिंग कराने का जिम्मेदार वन निगम है। निगम के कर्मचारी रोक-टोक नहीं करते हैं। एक तरीके से विभाग अनैतिक माइनिंग को बढ़ावा दे रहा है क्योंकि वन निगम रॉयल्टी काटता है और गौला से ही इसे रोका जा सकता है। दुर्घटनाएं प्रशासन और पुलिस की चूक से होती हैं। 185 क्विंटल ग्रॉस वजन तक की आरसी कटती है और इसमें भी पांच प्रतिशत छूट मिलती है। - मोहम्मद इमरान, डंपर स्वामी
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इन्होंने भी रखी बात

अगर सभी मिलकर नियमों के तहत काम करें तो कुछ भी गलत नहीं होगा। प्रशासन क्रशर को निर्देश दें कि शहरी क्षेत्र की रायल्टी शाम सात बजे बाद सुबह छह बजे से पहले हो। प्रशासन की नाक के नीचे शहर में दिन भर मिक्सर मशीनें चलती रहती हैं। - जगदीश शर्मा, डंपर स्वामी

नो एंट्री प्वाइंट में खुले आम पैसे का लेन देन चलता है लेकिन देखने वाला कोई नहीं है। अगर सही तरीके से चेकिंग हो तो किसी की मजाल नहीं कि नो एंट्री में दाखिल हो। तब शहर में दिन में न तो भार वाहन गुजर सकेंगे और न इनकी स्पीड इतनी ज्यादा होगी। - तरुण बेलवाल, डंपर स्वामी।

हाईकोर्ट की साफ गाइडलाइन है कि आरसी से ज्यादा वजन नहीं ले जा सकते हैं। ये नियम तो निगम, खनन और परिवहन विभाग को पता ही है। वाहनों में तेज लाइट होनी चाहिए, रेडियम का इस्तेमाल हो, डंपर आदि भार वाहनों में परिचालक भी होने चाहिए। - कंचन जोशी, डंपर स्वामी

अगर पुलिस प्रशासन चाहे तो सड़क पर कोई साइकिल भी नहीं चला सकता। ऐसा कोई चौराहा नहीं जहां प्रशासन नहीं रहता। एक सिपाही चौराहे पर ख़ड़ा हो जाए तो चार सड़कों की निगरानी कर सकता है। प्रशासन को चाहिए कि जो वाहन माल लेकर गलियों में जाते हैं उनकी रायल्टी न कटे। - उमेश भट्ट, डंपर स्वामी

एक घंटे के अंदर मिले उपचार

आरटीओ ने डंपर मालिकों से कहा कि कभी-कभी वाहन से हादसे हो जाते हैं। घायल सड़क पर पड़ा होता है उसे बचाने वाला कोई नहीं होता है। हादसे के बाद घायल की जान बचाने के लिए एक घंटा महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि डंपर या टिप्पर चालक को कोई भी घायल दिखे तो उसे अस्पताल पहुंचाएं। अस्पताल पहुंचाकर घायल की जान बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने गुड सेमटिरन और केंद्र सरकार की राहवीर योजना में इनाम भी मिलता है।

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