अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में वाहन स्वामियों ने कहा कि जब मुख्यमंत्री आते हैं तो 10 किमी के दायरे में सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। हर चौराहे में पुलिस तैनात रहती है। अन्य दिनों इन्हीं चौराहों पर पुलिस की शह मिलने के बाद ही बड़े वाहन अंदर जा सकते हैं। इन्हीं चौराहों पर पैसों के जरिये सारा खेल होता है।
डंपर स्वामियों ने स्पष्ट किया कि 80 फीसदी डंपर तो गौला नदी में चलते हैं और सारा माल क्रशरों में डलता है। उनका कहना था कि डंपर स्वामी या चालक नहीं चाहते किसी के घर का चिराग बुझे। इसमें प्रशासन और पुलिस को ओवरलोडिंग और गलियों में आने वालों पर भारी भरकम जुर्माना लगाना चाहिए। संवाद में अब्दुल माजिद, अब्दुल वाजिद, भूपेंद्र सिंह, कौस्तुभ भट्ट, संजय वोहरा, वीरेंद्र सिंह नेगी, भुवन चंद्र जोशी, नवीन चंद्र आदि कई डंपर स्वामी मौजूद रहे।
दुर्घटना तेजी से आ रहे ट्रक या टिप्परों से होती है लेकिन बदनाम डंपर वाले होते हैं। हमारे अधिकतर वाहन शहर में आते ही नहीं हैं। शहर में अगर कुछ आते भी हैं तो सारा खेल पुलिस की शह पर ही होता है। अगर नो एंट्री जोन में वाहन जा रहे हैं तो प्रशासन की लापरवाही है। नियम विरुद्ध काम करने वालों पर कार्रवाई हो, जुर्माना लगाया जाए। हम पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। - मनोज मठपाल, अध्यक्ष डंपर एसोसिएशन
नो एंट्री प्वाइंट में खुले आम पैसे का लेन देन चलता है लेकिन देखने वाला कोई नहीं है। अगर सही तरीके से चेकिंग हो तो किसी की मजाल नहीं कि नो एंट्री में दाखिल हो। तब शहर में दिन में न तो भार वाहन गुजर सकेंगे और न इनकी स्पीड इतनी ज्यादा होगी। - तरुण बेलवाल, डंपर स्वामी।
हाईकोर्ट की साफ गाइडलाइन है कि आरसी से ज्यादा वजन नहीं ले जा सकते हैं। ये नियम तो निगम, खनन और परिवहन विभाग को पता ही है। वाहनों में तेज लाइट होनी चाहिए, रेडियम का इस्तेमाल हो, डंपर आदि भार वाहनों में परिचालक भी होने चाहिए। - कंचन जोशी, डंपर स्वामी
अगर पुलिस प्रशासन चाहे तो सड़क पर कोई साइकिल भी नहीं चला सकता। ऐसा कोई चौराहा नहीं जहां प्रशासन नहीं रहता। एक सिपाही चौराहे पर ख़ड़ा हो जाए तो चार सड़कों की निगरानी कर सकता है। प्रशासन को चाहिए कि जो वाहन माल लेकर गलियों में जाते हैं उनकी रायल्टी न कटे। - उमेश भट्ट, डंपर स्वामीएक घंटे के अंदर मिले उपचार
आरटीओ ने डंपर मालिकों से कहा कि कभी-कभी वाहन से हादसे हो जाते हैं। घायल सड़क पर पड़ा होता है उसे बचाने वाला कोई नहीं होता है। हादसे के बाद घायल की जान बचाने के लिए एक घंटा महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि डंपर या टिप्पर चालक को कोई भी घायल दिखे तो उसे अस्पताल पहुंचाएं। अस्पताल पहुंचाकर घायल की जान बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने गुड सेमटिरन और केंद्र सरकार की राहवीर योजना में इनाम भी मिलता है।