वित्तमंत्री डा. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि प्रदेश के विकास में वाणिज्य कर विभाग से जुड़े वकीलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वकील ही व्यापारियों का टैक्स सरकारी खजाने में जमा करवाते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों की तरह उत्तराखंड में भी व्यापार कर अधिवक्ताओं को सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
नैनीताल रोड स्थित एक बैंकट हाल में हल्द्वानी टैक्स बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में वित्तमंत्री ने कहा कि व्यापारियों के सहयोग से वाणिज्य कर विभाग का संग्रह लक्ष्य पूर्ण होता है। वैट अधिनियम के नवीनतम संशोधनों के बाद ही वाणिज्य कर के प्रावधानों का सरलीकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सर्बर लड़खड़ाने से आनलाइन रिटर्न दाखिल करने में दिक्कतें आ रही हैं।
व्यापार कर विभाग के दोषपूर्ण साफ्टवेयर को भी बदला जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यापारियों, कर अधिवक्ताआें के मध्य जो संवादहीनता है वह अत्यंत ही गंभीर है। इसे दूर करने के लिए शासन में गठित वाणिज्य कर सलाहकार समिति की प्रत्येक तीन माह में नियमित बैठकें कराई जाएगी। इसमें वकीलों एवं व्यापारियों के सुझावों पर विचार कर वाणिज्य कर विभाग की कार्यप्रणाली एवं अधिनियमों में संशोधन किया जाएगा।
डा. हृदयेश ने हैरानी जताई कि छह माह पूर्व फार्म 16 को आनलाइन कर दिया गया, लेकिन अब भी इस फार्म को मिलने में परेशानी है। उन्होंने कहा कि समाधान योजना स्थायी नहीं होती है। यह एक सुविधा है कि कोई कर जमा करने से वंचित रह गया हो तो वह योजना का लाभ उठा सकता है।
योजना को स्थायित्व प्रदान कर सुविधा देने की स्थिति में सरकार नहीं है। मान्यता प्राप्त कर अधिवक्ताओं को ही विभाग में वरीयता दी जाएगी। इस दौरान एसोसिएशन अध्यक्ष दिनेश चंद्र पांडे, उपाध्यक्ष अवरार अहमद, रमेश चंद्र दुम्का, सचिव सुमित गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष इंद्रपाल सिंह, एनके जोशी, गोविंद सिंह बिष्ट, मयंक भट्ट, टीटू शर्मा मौजूद थे।