गोरापड़ाव गेट पर गोरखधंधे के खुलासे के बाद से खलबली मची हुई है। वन विभाग ने गोरापड़ाव गेट से अपना स्टाफ हटा लिया है। वहीं, वन निगम को जांच रिपोर्ट का इंतजार है। इसी मामले में वन संरक्षक ने तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ से जांच रिपोर्ट मांगी है।
गोरापड़ाव गेट पर एक ही नंबर के कई वाहनों के संचालन और अवैध खनन का खुलासा हुआ था। एक ही नंबर के वाहनों के चलने से वन, वन निगम की भूमिका सवालों में है। वन क्षेत्राधिकारी चंदन अधिकारी के अनुसार गेट पर तैनात स्टाफ को हटा लिया गया है।
वन निगम के डीएलएम बीडी हर्बोला का कहना है कि गेट पर वन एवं वन निगम दोनों का स्टाफ तैनात होता है। मामले की जांच कराई जा रही है, रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई होगी। वहीं, मामला उच्चाधिकारियों तक भी पहुंचा है।
वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डॉ. पराग मधुकर धकाते का कहना है कि मामले में डीएफओ से रिपोर्ट मांगी गई है। दूसरी तरफ खुलासे के बाद से वन विभाग की टीम सक्रिय हुई है। संवेदनशील जगहों पर टीमों ने खोजबीन अभियान चलाया।
फिटनेस फेल से लेकर ‘नंबर दो’ के वाहन भी खनन में
गौला में खनिज निकालने में फिटनेस फेल से लेकर ‘नंबर दो’ के (चेसिस, इंजन में बदलाव) वाहनों को भी खपाया गया है। इन सभी को लेकर संबंधित विभाग आंख बंद किए रहता है।
गोरापड़ाव गेट पर एक ही नंबर के दो वाहन चलते हुए पकड़े गए हैं।
विभाग को आशंका है कि इस तरह के और भी वाहन चल रहे हैं और सेटिंग के जरिए खनिज निकाला जा रहा है। बात केवल यहीं तक सीमित नहीं है, खनन के लिए फिटनेस फेल वाहन भी खुलेआम दौड़ाए जा रहे हैं। इन पर परिवहन विभाग की नजर शायद ही जाती हो।
प्रशासन ने यूपी 63 ई/9765 नंबर के जो दो वाहनों को पकड़ा था, उसमें से एक वाहन में हेडलाइट तक टूटी हुई थी। गौला में करीब सात हजार तक वाहन खनन कार्य में लगे हैं। इसमें कई वाहनों की स्थिति बदहाल है। कुछ वाहन तो सिर्फ लोहे के अस्थि पंजर मात्र हैं, जिनको सड़क पर दौड़ाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार गेटों पर नंबर दो के वाहन भी चल रहे हैं। इसमें से कुछ ऐसे वाहन थे, जिनकी हालत खराब होने के बाद मालिक ने वाहन कटवा दिया, फिर उसी नंबर की चेसिस, इंजन को ‘दूसरे वाहन’ पर सफाई से लगा दिया। अगर विभागीय जांच गेटवार गंभीरता से हो जाए तो कई वाहन पकड़ में आ सकते हैं।
मीटिंग तक ही सिमटी हुई समिति
व्यवस्थित खनन के लिए जिला खनन समिति बनी हुई है। इसके अध्यक्ष डीएम होते हैं। इसमें वन, वन निगम, पुलिस, परिवहन आदि विभागों के अधिकारी शामिल होते हैं। मोटे तौर पर समिति की भूमिका केवल मीटिंग, खनन अनुमति देने तक ही सीमित रहती है।
नेताओं के आने लगे फोन
गोरापड़ाव गेट पर पकड़े गए वाहन को छुड़वाने के लिए दबाव का खेल शुरू हो गया है। बताया जा रहा है नेताओं के फोन पहुंचने लगे हैं।