परिवर्तन यात्रा के समापन पर हल्द्वानी के एमबी इंटर कालेज में जुटी भीड़ के सामने प्रदेश का भाजपा नेतृत्व प्रदेश की सियासत में उभर कर सामने आई एक खास मजबूरी का इजहार भी कर गया। 36 का जादुई आंकड़ा अब इतना आकर्षक नहीं रह गया है। नेताओं पर शायद पूर्ण बहुमत से भी आगे जाकर प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने का इतना दबाव पहले कभी नहीं रहा।
पूर्ण बहुमत की अपील प्रदेश के चुनावों में पहले भी की जाती रही। इस अपील में मजबूरी का कम और आकांक्षा का भाव अधिक रहता आया है। 2012 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को 32 सीटें मिली थीं और भाजपा को 31 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। अब 2016 में प्रदेश में सियासत का चेहरा तेजी से बदल गया है। प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में पहली बार 2016 में किसी दल से एक साथ इतनी बड़ी संख्या में विधायक टूटे। विधायकाें की खरीद फरोख्त के किस्से भी आम हो गए। तोड़ फोड़ का सिलसिला अंदरखाने अभी जारी है और दोनों ही राजनीतिक दल इससे इनकार भी नहीं कर रहे हैं।
ऐसे में प्रदेश में 36 के जादुई आंकड़े की चमक भी कम हो गई है। बुधवार को एमबी कालेज के मैदान में जुटी भीड़ के सामने भाजपा के झारखंड प्रभारी त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तो साफ ही कहा कि उत्तराखंड में लंगड़ी सरकार नहीं होनी चाहिए। भाजपा के चारों मुख्यमंत्री भी सुरक्षित स्पष्ट बहुमत की ही अपील कर गए। जाहिर है कि प्रदेश में अब राजनीतिक दलों को टूट फूट का डर भी सता रहा है।