गांधी आश्रम की पहचान सिर्फ खादी का कुर्ता और पायजामा बेचने तक नहीं रही है। ब्रांडेड रेडीमेड गारमेंट कंपनियों से प्रतिस्पर्द्धा में गांधी आश्रम ने बाजार बढ़ाया है। गर्मी शुरू होने के साथ खादी के गारमेंट्स की बिक्री तेज होने लगी है।
गांधी आश्रम ने खादी वस्त्रों के इतर तेल, साबुन से लेकर हर्बल और स्वदेशी उत्पादों का बाजार खड़ा किया है। आश्रम से जुड़े स्वयं सहायता समूहों को भी उत्पाद बेचने के लिए बेहतर प्लेटफार्म मिला है। गांधी आश्रम के उत्पादों का मार्केट बढ़ने से उसका टर्नओवर हर महीने बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावे देने से गांधी आश्रम आत्मनिर्भर होकर नामी ब्रांडेड कंपनियों के साथ बाजार की दौड़ में खड़े हैं। हल्द्वानी में गांधी आश्रम की आठ रिटेल शॉप हैं। फतेहपुर में उत्पादन और भंडारण होता है।
आश्रमों से दर्जनों स्वयंसेवी संस्थाओं के हजारों लोग जुड़े हैं। संस्थाओं का जैविक, हर्बल और स्वदेशी उत्पाद आश्रमों के माध्यम से बाजार में बिकता है। सदर बाजार स्थित गांधी आश्रम के व्यवस्थापक गोविंद सिंह बिष्ट बताते हैं, गांधी आश्रम की पहचान अब खादी के कपड़ों तक नहीं रही है।
खादी के रेडिमेड गारमेंट की क्वालिटी सुधार आया है। ग्राहकों की पसंद के हिसाब से फैंसी और कलरफुल गारमेंट्स की लंबी रेंज हैं। गांधी आश्रम के 40 से अधिक हर्बल और जैविक उत्पाद ग्राहकों के घर और किचन में जगह बना चुके हैं।
गोविंद बिष्ट बताते हैं, गांधी आश्रम के सरसों तेल, सतरीठा शैंपू, अगरबत्ती, च्यवनप्राश, मधुमेह का पाउडर, गिलोय, एलोवेरा, जामुन सिरका, साबुन, शहद, मसाले, चायपत्ती और जैविक दालों की डिमांड लगातार बढ़ रही है।
खादी के कपड़ों से ज्यादा बाजार खाद्य उत्पादों का बढ़ रहा है। सदर बाजार की रिटेल शॉप ने पिछले साल पौने तीन करोड़ का टर्नओवर किया है। नए वित्तीय वर्ष में टर्नओवर सवा तीन करोड़ रुपए का है।
नेहरू की जगह मोदी वास्कट
गांधी आश्रमों में नेहरू वास्कट अब मोदी के नाम से बिकने लगी हैं। मोदी वास्कट के अलावा नए रंगों से लैस कुर्तों और शर्ट की युवाओं में लोकप्रिय बढ़ी है। वास्कट साढ़े सात सौ से ढाई हजार रुपए तक है। गर्मियों में मांग बढ़ रही है। गांधी आश्रम में 14 हजार तक की साड़ियां भी हैं। सिल्क साड़ी की रेंज छह हजार से शुरू है। 14 हजार तक की साड़ियां हैं।