गोला नदी में उप खनिज की जांच करती केंद्रीय जल एवं मृदा परीक्षण संस्थान के वैज्ञानिक।
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हल्द्वानी/लालकुआं। गौला नदी से इस सत्र में कितने घनमीटर उपखनिज की निकासी की जा सकती है इसका लक्ष्य जल्द ही तय होने के आसार हैं। बुधवार को केंद्रीय जल एवं मृदा संरक्षण की टीम ने गौला में कई स्थानों पर सर्वे किया। अन्य जगहों पर भी सर्वे कर टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी जिसके आधार पर लक्ष्य तय होगा।
गौला सहित अन्य नदियों में खनन सत्र शुरू करने से पहले केंद्रीय जल एवं मृदा संस्थान की टीम द्वारा नदियों का सर्वे किया जाता है। सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर नदियों से उपखनिज निकासी का लक्ष्य तय होता है। इस वर्ष खनन क्षेत्रों में पानी होने से टीम द्वारा अब तक सर्वे नहीं किया गया था। बुधवार को देहरादून से पहुंचे वरिष्ठ वैज्ञानिक एसके शर्मा और एचएस भाटिया द्वारा अपनी टीम के साथ गौला नदी के शांतिपुरी से गोरापड़ाव गेट तक सर्वे किया। बृहस्पतिवार को टीम गोरापड़ाव से शीशमहल गेट तक गौला नदी का सर्वे करेगी। सर्वे में डीएलएम लालकुआं वाईके श्रीवास्तव, वन क्षेत्राधिकारी गौला रेंज गणेश चंद्र त्रिपाठी आदि मौजूद रहे। नंधौर, शारदा और कोसी नदी का भी टीम सर्वे करेगी।
पहले 34.50 लाख घनमीटर तय हुआ था लक्ष्य
जल एवं मृदा संरक्षण संस्थान की टीम ने 17,18,19 मार्च को गौला नदी का सर्वे कर अपनी रिपोर्ट में 34.50 लाख घनमीटर उपखनिज निकासी का लक्ष्य तय किया था। सर्वे में शीशमहल, राजपुरा, लालकुआं, शांतिपुरी गेट पर ही आरबीएम की मौजूदगी मिली थी। 25 अप्रैल को देहरादून में वन निगम, विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई जिसमें प्रमुख वन संरक्षक ने वन निगम के प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर एक और सर्वे कराने का निर्णय लिया था।
देरी से खनन, सर्वे में भी देरी
गौला नदी में हर वर्ष अक्तूबर से मई तक खनन सत्र चलता है। लेकिन इस वर्ष खनन सत्र एक माह देरी से शुरू हुआ और सर्वे में भी एक माह की देरी रही। जबकि सत्र शुरू करने से पहले सर्वे कर जल एवं मृदा संरक्षण द्वारा रिपोर्ट तैयार की जाती है। सर्वे के बाद तय लक्ष्य में से अब तक गौला से की गई निकासी को घटाया जाएगा।