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‘घर’ में बेगाने हुए कैलास यात्री

Thu, 04 Jun 2015 01:03 AM IST
कैलाश पाठक/अमर उजाला,नैनीताल
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अंतरराष्ट्रीय महत्व की कैलास मानसरोवर यात्रा उत्तराखंड से होती है, लेकिन उत्तराखंड से कैलास मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को राज्य सरकार कोई सुविधा नहीं देती है। जबकि गुजरात, दिल्ली समेत कई राज्य अपने राज्य के कैलास मानसरोवर यात्रियों को 25 हजार रुपये तक की सब्सिडी देते हैं। उत्तराखंड में 2007 में भाजपा सरकार ने कैलास यात्रियों को 25 हजार रुपये सब्सिडी देने का शासनादेश तो जारी किया, लेकिन तीन साल बाद सब्सिडी देना बंद कर दी गई।
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अविभाजित यूपी का हिस्सा रहे उत्तराखंड से 1981 से कैलास मानसरोवर यात्रा हो रही है। नौ नवंबर 2000 में अलग उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया। कैलास मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को गुजरात, दिल्ली समेत कई राज्यों द्वारा यात्रा खर्च में सब्सिडी दिए जाने की जानकारी के बाद यहां भी यह मांग यात्रियों द्वारा उठाई गई। 2007 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने पर तत्कालीन पर्यटन मंत्री प्रकाश पंत ने उत्तराखंड के कैलास यात्रियों को भी 25 हजार रुपये सब्सिडी देने का शासनादेश जारी करवाया, लेकिन तीन साल बाद ही यह सब्सिडी बंद कर दी गई और सब्सिडी बंद किए जाने के कारणों का भी खुलासा नहीं किया गया।

चीन की सीमा से जुड़े जिस राज्य के लोग कैलास यात्रा पर जाने की चाह रखते हैं, अपनी ही सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है। कुमाऊं मंडल विकास निगम के मंडलीय प्रबंधक (पर्यटन) डीके शर्मा ने बताया कि एक-दो बार ही सरकार द्वारा यात्रियों को सब्सिडी दी गई।
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कोट
पर्यटन मंत्री रहते मैंने 25 हजार रुपये सब्सिडी देने का ऐलान किया था। 2007, 2008 और 2009 में सब्सिडी दी गई। फिर दी गई कि नहीं मुझे नहीं मालूम, क्योंकि बाद में यह मंत्रालय मेरे अधीन नहीं रहा।
- प्रकाश पंत भाजपा नेता और पूर्व पर्यटन मंत्री।

मेरे बुजुर्ग तीर्थ ठीक, कैलास क्यों नहीं
प्रदेश सरकार ‘मेरे बुजुर्ग मेरे तीर्थ’ योजना के तहत बुजुर्गों को निशुल्क चारधाम यात्रा करा रही है। बाकायदा उन्हें यात्रा कराकर सुरक्षित घर भेजने की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर डाल रखी है। इसका पूरे प्रदेश में स्वागत हो रहा है। इसी तर्ज पर कैलास मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को किसी तरह की सहायता नहीं करना सरकार की दोहरी नीति का परिचय देता है। एक ही राज्य में अलग-अलग तीर्थ यात्राओं के लिए दोहरे मानक बनाए गए हैं। जिससे प्रदेश सरकार की किरकिरी भी खूब हो रही है।
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